लोग इस तरह हो जाते है मोटापे के शिकार!

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सार

मोटापा एक पुरानी व प्रगतिशील बीमारी है। यह पूरे शरीर को प्रभावित करती है। इससे जुड़ें मामले आपको सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में देखने को मिल जाएंगे। आप स्वयं भी कहीं ना कहीं इस बात से वाकिफ होंगे कि किस तरह बदलती दिनचर्या हमारे सामने मोटापे जैसी खतरनाक परिस्थिति पैदा कर सकती है।

विस्तार

मोटापा एक इस तरह का विकार है, जिसमें शरीर में चर्बी की मात्रा बढ़ जाती है। यह स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ा देता है। मोटापे के लिए कोई भी एक कारक जिम्मेदार नहीं है। जैविक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय कारक आसानी से उच्च कैलोरी वाले भोजन विकल्प युवाओं के खाने के व्यवहार को प्रभावित करते हैं। इनके अलावा मोबाइल, टेबलेट, कंप्यूटर जैसे मीडिया उपकरणों के कारण बच्चों और किशोरों में स्क्रीन समय बढ़ गया है, जिससे शारीरिक गतिविधियों में कमी आई है। यह बीमारी शरीर के प्रत्येक हिस्से को प्रभावित करती है, जिसमें जोड़ों की समस्या, फेफड़े पर प्रभाव, यकृत और प्रजनन स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है।

अधिक मात्रा में कैलोरी लेना, अधिक वसा का सेवन और आहार में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा ज्यादा होना मोटापे को बढ़ावा देते हैं। यह बीमारी विश्व स्तर की है। कोरोना काल के समय से लोगों में मोटापे की समस्याओं में वृद्धि हुई है क्योंकि लॉकडाउन के समय लोगों की दिनचर्या में काफी बदलाव आया था। शारीरिक गतिविधियों में कमी आई थी। घर से कार्य करने की आदत, चिंता और अव्यवस्थित खानपान ने मोटापे के मामलों को बढ़ा दिया।

एक स्वस्थ शरीर का मापन लंबाई और वजन के सही अनुपात से किया जाता है। बॉडी मास इंडेक्स मीटर में ऊंचाई के वर्ग से विभाजित किलोग्राम में एक व्यक्ति का वजन है। गणना का यह तरीका महिला और पुरुषों के लिए अलग-अलग है। बीएमआई की गणना आप स्वयं कर सकते हैं या इसे ऑनलाइन भी कर सकते हैं। सामान्य बीएमआई 18.5 किग्रा/मीटर वर्ग से शुरू होकर 25 किग्रा/मी2 तक होता है। अगर संख्या 15 से कम है तो इसका मतलब है कि आपका वजन कम है। 25 से 30 बीएमआई को अधिक वजन माना जाता है और 30 से अधिक का मतलब है कि आप मोटे हैं।

निष्कर्ष

विश्व व्यापक मोटापे की बीमारी भले ही चिंताजनक हो लेकिन इस पर नियंत्रण किया जा सकता है। कोई भी व्यक्ति एक सही दिनचर्या के पालन से इस समस्या से छुटकारा प्राप्त कर सकता है, इसलिए सबसे पहले बीएमआई की गणना से अपने मोटापे के स्तर का मूल्याङ्कन कीजिए। फिर उस हिसाब से अपनी डाइट और शारीरिक गतिविधियों में बदलाव करें।


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