World AIDS Day 2021: HIV/AIDS को कैसे हराया जाए?

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इस बात से तो सब वाकिफ है कि HIV को हराना आसान नहीं है। इस बात की पुष्टि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी करता है। प्रतिवर्ष 10 लाख लोग HIV से मर जाते हैं, क्योंकि अधिकतर लोगों को तो पता भी नहीं होता कि वे पीड़ित है या फिर उनका इलाज़ देर से होता है। जिस तरह कोरोना महामारी ने पिछले 24 महीनो से भी अधिक समय तक जन-जीवन को प्रभावित किया है, उसी तरह डर, नजरअंदाज और कलंक के कारण 1980 के दशक में विश्व में HIV महामारी ने प्रभावित किया था।

एचआईवी (HIV) रोग के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष 1 दिसंबर को ‘विश्व एड्स दिवस (World AIDS Day)’ मनाया जाता है। वर्ष 2021 में विश्व एड्स दिवस “End inequalities. End AIDS” थीम के साथ मनाया जा रहा है। UN एड्स के अनुसार इस महामारी के शुरुआत (वर्ष 1988) से आज की तिथि तक 79.3 मिलियन लोग HIV से संक्रमित हो चुके हैं। एचआईवी प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर करता है व पोषक तत्वों के सेवन या अवशोषण को बाधित करके पोषण संबंधी स्थिति को कमजोर करता है। 


HIV/AIDS को हराना क्यों मुश्किल है?

UN एड्स ने बताया कि वर्ष 1997 में विश्व में उच्च स्तर पर पहुँचने के बाद नए HIV संक्रमण में 52% की कमी आई है। वर्ष 1997 में 3.0 मिलियन लोग संक्रमित हुए थे, जिसकी तुलना में वर्ष 2020 में लगभग 1.5 मिलियन लोग एचआईवी से संक्रमित हुए थे। इसके साथ वर्ष 2010 के बाद बच्चों के मामले में संक्रमण दर में 53% की गिरावट आई है।

वर्ष 2020 में इस बीमारी के साथ जीने वाले लोगों कि संख्या 37.7 मिलियन थी, जिसमें 6,80,000 लोग एड्स और इससे संबंधित बीमारियों से मारे गए। यह वो स्थिति है, जब वर्ष 2030 तक दुनिया एड्स को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार यह लक्ष्य पूरा करने में नए संक्रमण की दर और मौतों का आंकड़ा अभी तक प्रभावी रूप से कम नहीं हो पाया है। HIV की रोकथाम, देखभाल और उपचार सेवाओं तक अपर्याप्त पहुँच इस लक्ष्य को कठिन बना रही है।

HIV/AIDS में भारत की स्थिति:

राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO) की HIV अनुमान 2019 रिपोर्ट के अनुसार देश में 23.48 लाख लोग इस बीमारी के साथ जी रहे थे। इस रिपोर्ट के अनुसार अधिकतर लोग महाराष्ट्र से थे। वर्ष 2019 में नए एचआईवी संक्रमण मामलों की संख्या 69,000 थी और एड्स से मरने वालों की संख्या 59,000 थी।

UN एड्स की कार्यकारी निदेशक विनी ब्यानिमा के अनुसार भारत को एड्स पर नियंत्रण पाने के लिए गर्भवती महिलाओं पर अधिक ध्यान देना चाहिए। सकारात्मक गर्भवती महिला से बच्चे तक संक्रमण फैलने के प्रयासों पर जोर देना चाहिए।


एचआईवी/एड्स को कैसे हराया जाए?

इस बीमारी से लड़ने और नए संक्रमणों को कम करने में पिछले 25 वर्षों से निरोध (Condom) ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके अलावा HIV उपचार के लिए प्रतिदिन ली जाने वाली सिंगल टैबलेट बेहद प्रभावी, सुरक्षित और सुविधाजनक मालूम हुई है। इसने उपचार लागत को कम करने के साथ इस घातक बीमारी को मधुमेह या उच्च रक्तचाप जैसी श्रेणी में बदल दिया।

बदलती तकनीकी और समय के साथ अब HIV / AIDS के लिए प्रतिदिन दवा लेने की जरुरत नहीं होगी। ब्रिटेन में इस तरह की पहल शुरू हो चुकी है, जिससे इस दवा के बदलने दो महीने में सिर्फ एक इंजेक्शन (Injection) लगवाना होगा। इसका नाम केवेनुआवा (Cabenuva) है, जो दो दवाओं कोबोटेग्रेविर के साथ रिलपिवरिन (cabotegravir with rilpivirine) से बनी है।


मुख्य रूप से HIV / एड्स को बढ़ावा डर, नजरअंदाज और कलंक के कारण मिला है। लोग इस बारे में उपचार लेने से भी कतराते है। इस सोच को बदलने के लिए स्कूलों के साथ अगर समुदाय स्तर पर एड्स के प्रति जागरूकता फैलाना आवश्यक है ताकि अधिक से अधिक लोग इस घातक बीमारी के प्रति जागरूक हो।


Dental health: क्या आप सही तरीके से अपने दांतों को ब्रश कर रहे हैं?

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एक टूथब्रश को अधिकतम तीन महीने तक उपयोग मे लाया जा सकता है। अगर आप अधिक रगड़-रगड़ कर ब्रश करते हैं तो आपको दन्त चिकित्सक के अनुसार इसे जल्दी बदल देना चाहिए क्योंकि इससे Tooth Brush के ब्रिसल्स बहुत जल्दी खराब हो जाते हैं, जो आपके Dental health के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

दांतों की अच्छी देखभाल और लंबे समय तक रख-रखाव के लिए अपने दांतों की नियमित रूप से सफाई करना अनिवार्य है। दिन में 2 बार हमें अपने दांतो की सफाई करनी चाहिए और कम से कम दो मिनट इसके लिए दिए जाने चाहिए। हालंकि, इस तरह की दिनचर्या का पालन करने बावजूद भी लोग डेंटन से जुड़ीं समस्याओं जैसे संवेदनशीलता, Plaque और दांतों के नुकसान की शिकायत करते हैं। 

इसका मुख्य कारण है अपने दातों को जोर से ब्रश करना यदि आप भी ऐसा करते हैं तो इसे तुरंत बंद कर दीजिए। जल्दबाजी में रहने वाले लोगों को दांतों से जुड़ी समस्याएँ अधिक सामने आती है क्योंकि कम से दांतों की अच्छी सफाई के लिए वे दांतों को अधिक दबाव से ब्रश करते हैं। 

दन्त चिकित्सक डॉ. रेड्डी के अनुसार Tooth brushing के तीन संभावित कारण निम्नलिखित है:

  • हाथ का अत्यधिक प्रभावी दबाव।
  • जरूरत से ज्यादा ब्रश करना।
  • टूथब्रश के अपघर्षक ब्रिसल्स कारण।

डॉ रेड्डी के अनुसार आक्रामक तरीका और अपघर्षक ब्रिसल्स, दांतों के लिए बहुत बुरा संयोजन है। उन्होंने बताया कि आक्रामक तरीके से ब्रश करने से दंतवल्क (enamel) और दांतों की अन्य परतें खो जाती है। इससे मसूड़ें भी पीछे खिसक जाते हैं और दांतों पर उनकी पकड़ कम हो जाती है।

इसके अलावा इससे आपके दांतों में सड़न पैदा हो सकती है और दांत जल्दी गिर सकते हैं। गर्म, ठन्डे और मीठे भोजन के प्रति संवेदनशीलता (Sensitivity) भी एक दुष्प्रभाव है। यह सब दर्शाता है की आप ओवरब्रशिंग कर रहे हैं।

ओवर ब्रशिंग के दुष्प्रभाव:

  • मसूड़ों का घटना
  • दांतों का संवेदनशील होना
  • मसूड़ों का क्षतिग्रस्त होना व खून आना

हमेशा हल्के दबाव से ही ब्रश करें और अपने टूथब्रश को तीन महीने के भीतर बदलें क्योंकि लंबे समय तक एक ही ब्रश के उपयोग से ब्रिस्टल भुरभुरा हो जाता है और इसकी प्रभावशीलता भी कम हो जाती है। वयस्कों को टूथपेस्ट के रूप में 'फ्लोराइड टूथपेस्ट' का उपयोग करना चाहिए लेकिन बच्चों को इसकी पहुँच से दूर रखना चाहिए।

डेंटल हेल्थ (Dental Health) के लिए जीवन में हमेशा निरंतरता बनाए रखनी चाहिए। एक अच्छे दिन कि शुरुआत ब्रश करने से ही होती है। दिन में 2 बार 2 मिनट के लिए सही तरीके से किया गया ब्रश आपको जीवन भर अच्छा दन्त स्वास्थ्य और मुस्कान प्रदान करता है।