आंतो में सूजन : अल्सरेटिव कोलाइटिस के लक्षण, कारण और देखभाल।

अल्सरेटिव कोलाइटिस एक प्रकार का रोग हैं, जिसमें रोगी की आंतो में सूजन आ जाती है। यह लंबे समय तक रोगी के पाचन तंत्र में सूजन और घाव की समस्या पैदा कर देता हैं। यह रोग इन्सान की बड़ी आंत और मलाशय के अंतरतम स्तर को अत्यधिक प्रभावित करता हैं। इस रोग में कुछ लक्षण सामने से आते हैं। जिससे इस रोग की पहचान होती हैं लेकिन आमतौर पर सामान्य दर्द की तरह लोग इस रोग के लक्षणों को नजरअंदाज करने की भूल कर देते हैं।

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आंतो में सूजन कभी - कभी सामान्य तो कभी - कभी बहुत खतरनाक हो सकता हैं। इसका पूर्ण इलाज अभी तक ज्ञात ना होने की वजह से यह पीड़ित के लिए खतरा बन सकता हैं। रोगी में मौजूद लक्षणों के आधार पर इसका उपचार किया जाता सकता हैं और यह लंबे समय तक चलता हैं। आज हम Lifes Fact के इस लेख के द्वारा अल्सरेटिव कोलाइटिस (आंतो में सूजन) के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे।


लक्षण -


इस रोग में इन्सान के शरीर में कई तरह के लक्षण दिख सकते हैं। ये लक्षण सूजन की स्थिति और वह कितना गंभीर है, इस पर निर्भर करता हैं। इस रोग के लक्षण ज्यादातर काफी सामान्य और हल्के होते हैं, जो कई बार नजर अंदाज कर दिए जाते हैं। ये लक्षण निम्न रूप से हों सकते हैं -

  1. रक्त और मवाद के साथ दस्त का आना।

  2. दस्त के साथ - साथ रक्त का मलशय से स्त्राव।

  3. बार - बार शौच जाने की स्थिति बनना, जिसमें भी शौच का ठीक से ना आना।

  4. पेट मे ऐठन के साथ दर्द होना।

  5. शरीर में थकान होना और वजन का घटना।

  6. कई बार बुखार का आना।

  7. बच्चो की विकास दर में रुकावट आना।


प्रकार -


आंतो में सूजन को उसके होने वाले स्थान के आधार पर वर्गीकृत किया जाता हैं। ये आंत सूजन वाला रोग कई हिस्सों पर प्रभाव डालता है, उसके अनुसार अल्सरेटिव कोलाइटिस के ये निम्न प्रकार हैं।

  1. अल्सरेटिव प्रॉक्टाइटिस - इस प्रकार में सूजन मलाशय (गुदा) के आस - पास वाले स्थान तक होती हैं। इसका पता सिर्फ एक मात्र लक्षण से लगाया जा सकता हैं। इसका संकेत यह हैं कि इस दौरान गुदा से खून बहता हैं।

  2. प्रॉक्टोसिग्मॉयडिटीज - इसमें सूजन शरीर के मलाशय और सिग्मा‌ॅईड बृहदांत्र (अवग्रह बृहदांत्र) पर होती हैं। पेट मे होने वाले दर्द, ऐठन और दस्त के लक्षणों के आधार इसका पता लगाया जा सकता हैं।

  3. पैंकोलाइटिस (अग्नाशयशोथ) - इस प्रकार में बृहदांत्र पूरी तरह से प्रभावित होता हैं। इसमें दस्त के साथ खून भी रिसता हैं। जिससे शरीर में तेजी से वजन घटनें के साथ थकान भी होती हैं। पेट मे दर्द और ऐठन जैसी समस्याएं में इस दौरान चालू रहती हैं।

  4. बाएं तरफ का कोलाइटिस - इसमें सूजन सिग्मॉइड और अवरोही बृहदांत्र के जरिए से मलाशय तक फैली रहती हैं। इसे खास तौर से पेट मे बाईं ओर दर्द की वज़ह पहचानते हैं।


इस रोग के होने के कारण -


  1. इस रोग के होने के मुख्य कारण अभी तक पूर्ण रूप से ज्ञात नहीं हैं। कुछ लक्षणों और बदलावों के आधार पर आहार और तनाव को इसका कारण मानते हैं लेकिन ये कारण सटीक नहीं हैं।

  2. इसके सम्भावित कारणों में प्रतिरक्षा प्रणाली की खराबी भी एक कारण हैं।

  3. आनुवांशिकता की वजह से आंतो में सूजन उन लोगों में अधिक होता हैं, जिनके पूर्वज बीमार थे। अन्य की लोगों की तुलना में भी देखा जाए तो आनुवांशिकता इस रोग के बढ़ने का एक कारण बन जाती हैं।


जटिल परिस्थितियां -

  1. बृहदांत्र में छेद की वजह से अत्यधिक रक्तस्राव होना भयावह स्थिति उत्पन्न कर देता हैं।

  2. शरीर से अत्यधिक मात्रा में पानी की कमी हो कर निर्जलीकरण होना।

  3. त्वचा, शरीर के जोड़ो और आंखो पर सूजन का आना।

  4. अस्थि हानि (ओस्टियोपोरोसिस) का होना।

  5. इसकी वजह से पेट के कैंसर होने की स्थिति और बढ़ जाती हैं।

  6. नसों और धमनियों में रक्त के थक्कों के होने का खतरा बढ़ना।


देखभाल -


अल्सरेटिव कोलाइटिस का रोगी अपने चिकित्सीय उपचारों के साथ प्राकृतिक उपचारों का सहारा ले कर इस रोग के लक्षणों को कम करने में सफलता प्राप्त कर सकता हैं। प्राकृतिक उपचारों से यह रोग पूर्ण रूप से ठीक तो नहीं हो सकता लेकिन इसके प्रभावों को कम करने में काफी योगदान देता हैं।

नियमित रूप से व्यायाम करना, अपने खान - पान में ध्यान देना और एक अच्छी दिनचर्या का पालन अक्सर मदद करता हैं। इस दौरान भी रोगी को अपनी दवा डॉक्टर के निर्देशानुसार ही लेनी चाहिए।


  1. तेजी से हो रहे निर्जलीकरण को रोकने के लिए अधिक पानी पिएं।

  2. दस्त होने के दौरान इलेक्ट्रोलाइट पेय पीना चाहिएं, जो कि इलेक्ट्रोलाइट के संतुलन को बनाए रखता हैं।

  3. कैल्शियम और विटामिन डी की कमी से हड्डियों के नुकसान को रोकने के लिए क्या कैल्शियम और विटामिन डी की खुराक पर्याप्त मात्रा में ले।

  4. एक बार में अधिक खाने की बजाय भोजन को कम मात्रा में दिन के कई भाग में खाएं।

  5. अपनी खान - पान में काम फाइबर वाले भोजन को शामिल करें।

  6. मक्खन, घी, तेल जैसे चिकने पदार्थों का सेवन कम करें।

  7. डेयरी उत्पादों से परहेज़ करें।


इस रोग के दौरान ये चीजें ना खाएं -


  1. ब्रेड, पास्ता, नूडल्स और मैकरोनी जैसे अधिक फाइबर वाले भोजन से परहेज़ रखें। ये रोगी के पाचन मे अधिक मुश्किलें पैदा कर देते हैं।

  2. ब्राउन राइस, किनोवा, जई और चावल जैसे भोजन भी ना खाएं।

  3. अखरोट, काजू, बादाम, मूंगफली और पिस्ता जैसे सूखे मेवों से दूरी बनाना रोगी के लिए फायदेमंद रहता हैं।

  4. तिल के बीज, अलसी के बीज, बाजरा, सूरजमुखी के बीज, पाइन नट्स, कद्दू के बीज आदि को भी अपनी आहार सूची से हटाए। बीज में अघुलनशील फाइबर होता हैं, जो गैस, दस्त और सूजन जैसी समस्याएं पैदा कर देते हैं।

  5. सेम, मसूर, मटर, सोया नट्स, सोयाबीन आदि में प्रोटीन अधिक मात्रा में पाया जाता हैं। फलियों में ऐसी शर्करा होती हैं, जो पचने योग्य नहीं होती।

  6. निम्न फाइबर युक्त फल जो कच्चे, सूखे और बीज ना हटने वाले फल जैसे जामुन। आप छिलके वाले फल खा सकते हैं।

  7. फाइबर युक्त सब्जियां, मकई सहित अधपक्की, डिब्बा बंद सब्जियां और आलू के सेवन से बचें। उन्हे इस तरह से अपने आहार मे शामिल करें, जिससे वो जल्दी पच सकें जैसे - शुद्ध सब्जियों के सूप बना कर।

Lifes Fact

अगर आपको लगे कि आपका वर्तमान उपचार या आपकी दिनचर्या से अल्सरेटिव कोलाइटिस के उपचार में कार्य नहीं करें तो अपने डॉक्टर से समय - समय पर बात जरूर करें। इस दौरान इस रोग के लक्षणों पर पूरी तरह से नजर बनाएं रखें और बिगड़ते हालातों में बिना देर किए अपने डॉक्टर से मिले। हमें आशा हैं की Lifes Fact के इस लेख से आपको आंतो के सूजन के बारे में पर्याप्त जानकारी प्राप्त हुई होंगी। अधिक जानकारी के लिए हमें कॉमेंट या मेल ज़रूर करें।

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