10 आसान तरीकों से करें अपने मेटाबॉलिज्म को बूस्ट।

शरीर में होने वाली सभी रासायनिक प्रतिक्रियाएं का वर्णन करता हैं, चयापचय। ये सभी क्रियाएं इन्सान के लिए बेहद जरूरी होती हैं। अपने शरीर में चयापचय दर, अपने द्वारा एक दिन में बर्न की गई कैलोरी की मात्रा को दर्शाती हैं। यानि जितनी चयापचय क्रिया जल्दी होगी, उतनी कैलोरी बर्न होगी। इस बात से तो सभी वाकिफ हैं कि शरीर की चर्बी कम करने के लिए कैलोरी बर्न करना बहुत जरूरी होता हैं। इसलिए हमारा मेटाबोलिज्म जितना अच्छी गति से काम करेगा, उतना हमें मोटापे का खतरा कम होगा। (ये 10 आदतें बन रही हैं, आपके बढ़ते मोटापे का कारण)

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चयापचय के उच्च होने से शरीर में अधिक ऊर्जा का निर्माण होता हैं, जो आपकी दिनचर्या के लिए बेहतर हैं। आज Lifes Fact के इस लेख में हम जानेंगे उन आसान 10 तरीकों के बारे में, जो मदद करेंगे हमारे मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करने में।


  1. भरपूर मात्रा में प्रोटीन का सेवन करें - जब आप अधिक प्रोटीन का सेवन करेंगे तो यह आपको ना सिर्फ अधिक खाने से रोकेगा, उसके साथ यह आपके चयापचय को भी बूस्ट करेगा। क्योंकि यह मासपेशियों के नुकसान को कम करता हैं।

  2. ठंडा पानी पिएं - हमेशा कोल्ड ड्रिंक्स की बजाय ठंडा पानी पिए क्योंकि इन शर्करा युक्त पेय पदार्थो में कैलोरी होती हैं। इसलिए जो लोग सिर्फ ठंडा पानी पीते हैं, उन्हे वजन कम करने में आसानी होती हैं। जब आप ठंडा पानी पीते हैं तब आपका शरीर तापमान को नियंत्रित करने के लिए गर्मी उत्पन्न करता है, जिसमें ऊर्जा का उपयोग होता है।

  3. तीव्रता वाले व्यायाम अंतराल में करें‌ - यह आपको फैट बर्न करने के लिए मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करने में मदद करता हैं। इसमें से व्यायाम करें जिसको फुर्ती से किया जाए, इन्हे सेट्स बना कर करें।

  4. अधिक भार उठाने वाले व्यायाम करें - वसा की तुलना में मांसपेशियों में मेटाबॉलिज्म अधिक होता हैं। मांसपेशियों के निर्माण में चयापचय और अधिक तेजी से होता हैं। इसलिए अधिक भार उठाने वाले व्यायाम मांसपेशियों के निर्माण के साथ मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करने में मदद करते हैं।

  5. दिन में बैठने से अधिक खड़े रहे - लंबे समय तक बैठने से आप में कैलोरी बर्न बहुत कम होती हैं। इसकी बजाय अगर आप कुछ काम खड़े रहकर करेंगे तो उसमें ज्यादा कैलोरी बर्न होंगी।

  6. ग्रीन टी पियें - ग्रीन टी चयापचय को बूस्ट करने में मदद करती हैं। यह आपके चयापचय को 5% तक बढ़ा सकती हैं। यह शरीर में जमा फैट को फैटी एसिड में तब्दील कर देती हैं। जिससे फैट बर्न 16 - 17% तक बढ़ जाता है, इसीलिए तो वजन घटाने के लिए ग्रीन टी का इस्तेमाल किया जाता हैं।

  7. मसालेदार और तीखा भोजन खाएं - कैप्साइसिन से भरपूर मिर्च आपके मेटाबॉलिज्म को बढ़ाती हैं। लेकिन यह तरीका स्पाइसी फूड पसंद करने वालों के लिए हैं। पाइल्स रोग से पीड़ित रोगी यह तरीका ना अपनाएं।

  8. रात की नींद अच्छे से लें - नींद की कमी रक्त में शर्करा के स्तर को बढ़ा देती हैं जो मधुमेह का कारण बनती हैं। रात में नींद की कमी आपकी भूख को बढ़ाती हैं, और यह मोटापे का भी कारण कर बनती हैं।

  9. कॉफ़ी पिएं - कॉफी में उपस्थित कैफिन मेटाबॉलिज्म को 10% तक बढ़ा सकती हैं। यह भी फैट बर्न करने में मदद करती हैं। यह आपको वजन कम करने में सहायता करती हैं। यानी चयापचय को बढ़ाने के लिए कॉफी भी एक अच्छा विकल्प हैं।

  10. नारियल तेल का खाने में उपयोग करें - अन्य तेल के मुकाबले नारियल तेल कुकिंग के लिए बेहतर रहता है क्योंकि इसमें उपस्थित फैट अन्य तेल, बटर और घी के फैट के‌ मुकाबले चयापचय में वृद्धि करता हैं।


(आपकी दिनचर्या चयापचय की दर को कम कर सकती हैं।)

अपने जीवन शैली में उपरोक्त छोटे बदलाव करके और इनको अपनाकर आप मेटाबॉलिज्म को बूस्ट कर सकते हैं।‌ यह आपको वजन कम करने के साथ ऊर्जा प्रदान करने में उपयोगी रहेगा।

आपकी दिनचर्या चयापचय की दर को कम कर सकती हैं।

चयापचय का उच्च रहना ना सिर्फ वजन कम करता हैं, बल्कि उसे बढ़ने से भी रोकता हैं। यानि हाई मेटाबॉलिज्म इन्सान को ना सिर्फ मोटा होने से रोकता हैं, इसके साथ आपका मोटापा घटाता भी हैं। इसे पढ़ कर आपके मन में भी यह सवाल जरूर आया होगा कि अगर चर्बी कम करना इतना आसान हैं तो भी लोग मोटे कैसे हो जाते हैं।

सामान्य जीवन की कई गतिविधियां हमारे चयापचय को धीमा कर देती हैं, बिगड़ी हुई दिनचर्या, कम मात्रा में कैलोरी लेना आपके मेटाबॉलिज्म को कम कर सकता हैं, कम कैलोरी लेना आपके चयापचय को धीमा कर देता हैं, प्रोटीन का अधिक सेवन, आपको वजन घटाने के दौरान चयापचय की दर को नियंत्रित करने में मदद करता हैं, कम नींद आपके चयापचय की गति को भी कम कर देती हैं, Lifes Fact

इसका मुख्य कारण हैं आपकी बिगड़ी हुई दिनचर्या। सामान्य जीवन की कई गतिविधियां हमारे चयापचय को धीमा कर देती हैं। जिसकी वजह से वजन बढ़ने लगता हैं। Lifes Fact की इस पोस्ट से जानेंगे की आखिर कौनसी वो चार गलतियां हैं, जो आपके मेटाबॉलिज्म को धीमा कर देती हैं।


अपने मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करें, इन 2 आसान तरीकों से।


  1. कम मात्रा में कैलोरी लेने से - कम मात्रा में कैलोरी लेना आपके मेटाबॉलिज्म को कम कर सकता हैं। हालांकि आपको वजन कम करने के लिए कम कैलोरी लेने की सलाह जरूर दी जाती हैं। लेकिन अच्छे परिणाम के चक्कर में बहुत कम कैलोरी का सेवन आपके लिए चयापचय से सम्बन्धित समस्याएं खड़ी कर सकता हैं। इसलिए लंबे समय तक कम कैलोरी लेना आपके चयापचय को धीमा कर देता हैं।

  2. कम मात्रा में प्रोटीन का सेवन - हमें प्रतिदिन अपने किलोग्राम में ज्ञात वजन की संख्या जितने ग्राम प्रोटीन की जरूरत होती हैं। यानि अगर आपका वजन 60 किलोग्राम हैं, तो आपको प्रतिदिन 60 ग्राम प्रोटीन की आवश्यकता होती हैं। यह आपकी वजन दर को नियंत्रित बनाए रखता हैं। प्रोटीन का अधिक सेवन, आपको वजन घटाने के दौरान चयापचय की दर को नियंत्रित करने में मदद करता हैं।

  3. दिन में अधिक समय बैठे रहना / निष्क्रिय रहना - अधिकतर लोगों की दिनचर्या में एक जगह लंबे समय तक बैठ कर काम करना शामिल हैं। ऐसे लोग की शारीरिक क्रिया दिन में न के बराबर होती हैं। इस तरह के लोग पर्याप्त मात्रा में प्रतिदिन कैलोरी बर्न नहीं कर  पाते। इस तरह यह आपके मेटाबॉलिज्म को धीमा कर देता हैं।

  4. पर्याप्त नींद ना लेना - यह बात तो सब लोग जानते और सुनते हैं कि अच्छी सेहत के लिए अच्छी नींद बहुत जरूरी होती हैं। आवश्यकता से कम सोना आपको दिल की बीमारी, डायबिटीज के अलावा डिप्रेशन जैसी गम्भीर बीमारियां दे सकता हैं। कम नींद आपके चयापचय की गति को भी कम कर देती हैं। इसके लिए हमेशा रात में अधिक नींद ले, क्योंकि दिन की बजाय रात में सोना ही हमारी सेहत के लिए फायदेमंद हैं।


अपनी दिनचर्या में शामिल उपरोक्त गतिविधियां आपके मेटाबॉलिज्म को धीमे करके आपके लिए मोटापे जैसी समस्या का कारण बन सकती हैं। इन्हीं पर नजर रख कर आप आसानी से अपने मोटापे रहित स्वस्थ जीवन का आंनद ले सकते हैं। 


जानें पथरी के घरेलू (अश्मरी) उपचार।

पथरी के आकार और स्थिति के हिसाब से उसका उपचार होता हैं, यह बात तो हम सब जानते हैं। आज हम Lifes Fact में जानेंगे ऐसे ही घरेलू उपायों के बारे में जो हमारी पथरी की समस्या को जड़ से मिटाने में मदद करें। पथरी या अश्मरी निर्माण किडनी में खनिज और लवणों के एकत्रित होने से होता हैं। (पथरी के बारे में जानकारी)

ऐसी स्थिति में शरीर में प्रचुर मात्रा में तरल पदार्थ पीना गुर्दे में से ना केवल पथरी को निकालने में मदद करता हैं बल्कि उसे बनने से भी रोकता हैं। अधिक मात्रा में पानी पीने से आपके शरीर के विषाक्त पदार्थ मूत्र के साथ बाहर निकलते हैं। यह पथरी को भी छोटे टुकड़ों में तोड़ कर, पेशाब के साथ बाहर निकालने का कार्य करता हैं।


पथरी के घरेलू उपचार में इन पेय पदार्थों के उपयोग से आपको बेहतर परिणाम मिलेंगे। (किडनी में पथरी के लक्षण)


  1. पानी - जब मूत्र मार्ग से पथरी का निष्कासन हो रहा होता हैं तो उस समय अच्छी मात्रा में पानी का सेवन उस किडनी पत्थर को निकालने में मदद करता हैं। ऐसी स्थिति में दिन में कम से कम 12 ग्लास पानी का सेवन करें। 

  2. नींबू का रस - नींबू में सिट्रट एसिड (Citrate Acid) होता हैं, जो कैल्शियम से बनने वाली इस पथरी को तोड़ता हैं। यह अश्मरी को बनने से भी रोकता हैं। इसके साथ यह विटामिन सी भी प्रदान करता हैं और बैकटीरिया पर भी नियंत्रण रखता हैं।

  3. तुलसी का रस - एसिटिक एसिड से भरपूर तुलसी का रस पथरी को तोड़ने और उसके दर्द को कम करने में मदद करता हैं। इसके अलावा इसमें कई प्रकार के पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो पाचन और सूजन संबंधित समस्या में फायदेमंद रहते हैं।

  4. सेव का सिरका (एप्पल साइडर विनेगर) - इसमें भी एसिटिक एसिड पाया जाता हैं, जो पथरी को तोड़ने में मदद करता हैं। यह दर्द से भी राहत दिलाता हैं। 2 बड़े चम्मच सेब के सिरके को लगभग 250 मिलीलीटर पानी में मिलाकर एक मिश्रण तैयार कीजिए। अब इसका सेवन पूरे दिन करें। (मधुमेह के रोगी इसका प्रयोग चिकित्सक के परामर्श के अनुसार ही करें)

  5. अजवाइन का रस ‌- यह शरीर से उन विषाक्त पदार्थों को निकालता हैं, जो पथरी का निर्माण करते हैं।

  6. अनार का रस - किडनी की कार्य क्षमता को सुधारने के लिए अनार का जूस उपयोगी माना जाता हैं। यह किडनी से सारी गंदगी निकाल कर उसे साफ और स्वस्थ बनाता हैं। पथरी के निर्माण और विकास को रोकने में यह काफी मददगार साबित होता हैं। यह पेशाब में अम्ल के स्तर को नियंत्रित करता हैं।

  7. व्हीटग्रास जूस - दिन में लगभग 250 मिलीलीटर व्हीटग्रास जूस पीना स्वास्थ्य के लिए उपयोगी रहता हैं। यह पथरी को तोड़ता हैं और मूत्र के बहाव को बढ़ाता हैं। इसके अलावा किडनी को भी साफ रखता हैं।


Note - पथरी की समस्या से निजात पाने के लिए उपरोक्त बताएं गए घरेलू उपचार, डॉक्टर की सलाह के अनुसार करें। अन्यथा यह आपके लिए अन्य समस्याओं का कारण बन सकते हैं।

किडनी में पथरी (अश्मरी) के 8 लक्षण!

क्या गुर्दे में पथरी की पहचान सिर्फ मूत्र मार्ग में जलन से ही होती हैं? या फिर किडनी में दर्द और जलन से? अगर आप लोग भी इसी तरह से वृक्क में अश्मरी यानि पथरी की पहचान करते हैं, तो आप लोग बहुत ही देर से इसके बारे में जागृत होते हैं। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो आप अपने स्वास्थ्य को ले कर काफी आलसी और ढीलें हैं। दोस्तों ये बात हम अच्छे से जानते हैं कि शरीर से किडनी स्टोन का निष्कासन कुछ घरेलू उपचार से ही हो जाता हैं। जिसमें कई बार तो यह कार्य पानी की अधिक मात्रा कर देती हैं। लेकिन ये घरेलू उपाय भी उस समय काम में आएंगे, जब आप अपने शरीर को ले कर सजग रहोगें। अन्यथा यह लापरवाही आपके लिए सर्जरी की स्थिति पैदा कर सकती हैं। Lifes Fact के इस लेख में आज हम जानेंगे गुर्दे में पथरी के पाएं जाने के 8 लक्षणों के बारे में। (जानें गुर्दे में पथरी (अश्मरी) की बीमारी के बारे में।)

  1. पीठ या पेट के आस - पास दर्द :- गुर्दे में अश्मरी का दर्द बहुत अधिक पीड़ादायक होता हैं। इसे  वृक्क शूल भी कहते हैं, इसका मतलब यह है कि इससे गुर्दे में कांटो के चुभने जैसा दर्द होता हैं। यह दर्द इतना बुरा होता हैं कि लोग इसकी तुलना चाकू के वार से भी करते हैं। यह दर्द तब शुरू होता है, जब पथर पतली मूत्रवाहिनी में जा कर फस जाता हैं। यह दर्द अचानक से शुरू होता हैं। यह दर्द पत्थर के स्थान बदलने के साथ बदलता रहता हैं। यह दर्द लहरों की तरह आता हैं। हमेशा बड़ा पत्थर अधिक दर्द का कारण बनता हैं।

  2. पेशाब करने के समय दर्द और जलन :- पथरी जब मुत्रवाहिनी और मूत्राशय के बीच होती हैं, तब पीड़ित को पेशाब करते तेज जलन और दर्द होता हैं। ऐसे में कई बार तो पथरी के साथ संक्रमण भी होता हैं।

  3. मूत्र के लिए तत्काल जाना :- बार - बार और सामान्य से अधिक बार बाथरूम के लिए जाने की तत्काल आवश्यकता भी आपको यह संकेत देती हैं कि किड़नी स्टोन आपके मूत्र मार्ग में चला गया हैं। ऐसा संक्रमण की स्थिति में भी होता हैं।

  4. मूत्र में खून आना :- यह भी पथरी के सामान्य लक्षणों में से एक हैं। इस दौरान आपका रक्त लाल के अलावा गुलाबी या फिर भूरे रंग का भी हो सकता हैं। मूत्र के साथ खून आने को रक्तमेह या हेमट्यूरिया कहते हैं। कई बार यह स्थिति आपकी पकड़ में नहीं आती क्योंकि रक्त कोशिकाएं बहुत छोटे रूप में बाहर निकलती हैं। ऐसे में अपने डॉक्टर से जांच करवाएं।

  5. बदबूदार मूत्र का आना :- आमतौर पर मूत्र करने के दौरान उसमें से बदबू नहीं आती क्योंकि उस समय आप बिलकुल स्वस्थ होते हैं और आपका मूत्र स्पष्ट। मूत्र के साथ दुर्गन्ध आना, आपके गुर्दे या मूत्र मार्ग में संक्रमण का संकेत हैं।

  6. थोड़ी - थोड़ी मात्रा में बार - बार पेशाब आना :- किड़नी की पथरी कई बार मुत्रवाहिनी में अटक जाती हैं। जिससे पेशाब धीरे - धीरे आने लगता हैं। इस वजह से आपको कई बार पेशाब करने जाना पड़ता हैं।

  7. मतली और उल्टी का होना :- पथरी के रोगियों को उल्टी और मतली आना आम बात हैं। ये लक्षण आपके शरीर की तीव्र पीड़ा को दर्शाते हैं। वृक में पथरी आपके खराब पेट की शुरुआत का कारण बनता हैं।

  8. बुखार और ठंड लगना :- ठंड लगने के साथ बुखार का आना आपके गुर्दे में या मूत्र पाठ में इंफेक्शन का लक्षण हैं। यह पथरी के अलावा अन्य गंभीर समस्याओं का संकेत भी ही सकता हैं। यह बुखार तेज होता हैं।


पथरी की बीमारी में छोटे पत्थर अक्सर अपने आप निकल जाते हैं तो कई बार उन्हें निकलने के लिए ऑपरेशन की आवश्यकता होती हैं। अगर आपको भी गुर्दे में अश्मरी के लक्षण मिलते हैं तो डॉक्टर से सम्पर्क करें।


जानें गुर्दे में पथरी (अश्मरी) की बीमारी के बारे में।

जानें क्या हैं पथरी -

शरीर में खनिज और लवण जमा होकर कठोर बन जाते हैं, और छोटे - छोटे क्रिस्टल के रूप में होते हैं, जिसे हम गुर्दे की पथरी (अश्मरी) कहते हैं। यह पथरी आपके वृक्क से लेकर मूत्र मार्ग में किसी भी भाग को प्रभावित कर सकती हैं। किडनी स्टोन अक्सर उस समय बनते हैं, जब मूत्र केंद्रित हों जाता हैं। इसी दौरान ये खनिज क्रिस्टलिकृत हो कर आपस में चिपक कर पत्थर का निर्माण कर देते हैं। (ये 10 आदतें बन रही हैं, आपके बढ़ते मोटापे का कारण)

पथरी होने के कईं कारण हो सकते हैं, जिसमें सबसे मुख्य कारण आहार होता हैं। कुछ खाद्य पदार्थ ऐसे होते हैं, जिनसे निकलने वाले रसायन पथरी का निर्माण करते हैं। इसके अलावा शरीर का अतिरिक्त वजन भी पथरी के बनने का कारण बन जाता हैं। कईं चिकित्सीय दवाईयां भी गुर्दे कि पथरी का कारण होती हैं।

इसलिए सभी तरह की पथरी से बचने के लिए सबसे प्रभावी तरीका हैं कि आप समय - समय पर पानी पीना ना भूलें। पानी की पर्याप्त मात्रा आपके मूत्र में उपस्थित अपशिष्ट पदार्थों को पतला करने में काफी मदद करता हैं, जिससे पथरी का निर्माण मुश्किल हों जाएं। (हार्ट को हेल्दी रखने के लिए करें ये एक्सरसाइज।)


गुर्दे से पथरी का पार होना बहुत पीड़ादायक होता हैं। जिसमें कई बार बहुत सारा पानी पीने से या फिर उचित दवाईयां लेने से राहत मिलती हैं। यह सब उपचार पथरी के आकार पर निर्भर करता हैं। कई बार किडनी स्टोन की साइज बड़ी होने पर वह मूत्र मार्ग में फंस जाती हैं। जिसके लिए सर्जरी की आवश्यकता होती हैं।

ये 10 टिप्स फायदेमंद रहेंगे एक्सरसाइज शुरू करने से पहले।

किसी भी व्यायाम को शुरू करने से पहले, करते वक्त या फिर करने के बाद हमें कईं बातों पर मुख्य रूप से ध्यान देना चाहिए। अन्यथा उस एक्सरसाइज का हमें पूर्ण रूप से फायदा नहीं हो पाएगा। जब हम नए सिरे से किसी वर्कआउट को शुरू करते हैं, तब हमारे सामने कईं चैलेंज आते हैं। जिसमें कुछ इस प्रकार हैं की शरीर में शुरुआती दर्द, खिंचाव का महसूस होना, जो कि सामान्य बात हैं।

10 टिप्स, वर्कआउट शुरू करने से पहले, एक्सरसाइज शुरू करने से पहले, जिम हो या घर, कसरत को शुरू करने से पहले वार्म अप, वर्कआउट के टारगेट
कईं बार गलत ढंग से किया गया व्यायाम आप के लिए मुसीबत बन जाता हैं। हम में से कईं लोग जोश - जोश में व्यायाम करना शुरू करते हैं, क्योंकि वे बहुत जल्दी अपने शरीर में परिवर्तन चाहते हैं। दोस्तों इस तरह से शुरू किए गए जिम या एक्सरसाइज में लोग निराश जल्दी हो जाते हैं और अपना लक्ष्य प्राप्त नहीं कर पाते। इसलिए आज हम Lifes Fact के इस लेख से जानेंगे उन 10 जरूरी टिप्स के बारे में, जो किसी भी इन्सान को एक्सरसाइज करने से पहले पता होनी चाहिए।

1. मुमकिन लक्ष्य निर्धारित करे -

चाहे जिम हो या घर कहीं पर भी वर्कआउट शुरू करने से पहले अपने लिए हमेशा मुमकिन होने वाले लक्ष्य निर्धारित करें और उसे उतना समय दें। क्योंकि मेहनत का फल हमेशा वक्त के साथ ही मिलता हैं।


2. निरंतरता बनाए रखें -

परिणाम प्राप्त करने के लिए हमेशा नियमित होना बहुत जरूरी होता हैं। अपने व्यायाम का एक टाइम टेबल बनाकर, उसका पालन करें।


3. वार्म अप करें -

अपनी कसरत को शुरू करने से पहले वार्म अप करना बहुत जरूरी होता हैं। यह आपके शरीर को एक्सरसाइज करने के लायक बनाता हैं। वार्म अप करने से शरीर में गर्मी का प्रवाह होता हैं। जिससे आपका शरीर मुख्य एक्सरसाइज के लिए लचीला बनता हैं।


4. जल्दबाजी कभी ना करें -

अपने लक्ष्य के प्रति कभी अधिक जल्दबाजी ना करें। कभी भी पागलों की तरह व्यायाम ना करें और ना ही व्यायाम के सेट्स बढ़ाएं। अपनी एक्सरसाइज को अपनी क्षमता के अनुसार या फिर प्रति सप्ताह 10% से ज्यादा ना बढ़ाएं।


5. असुविधा को पहचानें -

पहली बार एक्सरसाइज करते समय थकान, शरीर में दर्द, पसीना आना, मांसपेशियों में खिंचाव जैसी दिक्कतें आना सामान्य बात हैं। ऐसी स्थिति में अधिक परेशान ना होवे। यह शुरू में सब के साथ होता हैं, लेकिन ज्यादा असहज की स्थिति में अपने ट्रेनर से बात करें।


6. अपने दोस्त के साथ व्यायाम शुरू करें -

वर्कआउट के समय एक मित्र का साथ आप में हमेशा जोश बनाए रखता हैं। यह व्यायाम की निरंतरता बनाए रखने में भी मदद करता हैं। इसके अलावा जटिल एक्सरसाइज में आपका दोस्त आपके लिए सपोर्ट भी बन सकता हैं।


7. व्यायाम का समय -

सभी लोगों की दिनचर्या अलग-अलग होती हैं। अपनी व्यस्त दिनचर्या में हमेशा वह समय अपने वर्कआउट को दें, जिसमें आप अधिक ऊर्जावान होते हैं


8. इच्छा शक्ति को बनाए रखें -

व्यायाम करने के पहले और उस दौरान अपनी इच्छाशक्ति को हमेशा बनाए रखें। कभी भी अपने आलस को अपने ऊपर हावी ना होने दें। अपने अंदर मोटिवेशन बनाए रखें।


9. पानी की मात्रा -

वर्कआउट के समय बहुत अधिक मात्रा में पसीना आता हैं और शरीर में निर्जलीकरण भी होता हैं। इसलिए व्यायाम के समय पर्याप्त मात्रा में पानी पीना बिल्कुल ना भूलें।


10. हर बार नया करें -

कई बार एक जैसा व्यायाम करने से इंसान बोर होने लगता हैं। इसलिए अपने वर्कआउट में बदलाव करें और नए व्यायाम जोड़ें।


हार्ट को हेल्दी रखने के लिए करें ये एक्सरसाइज।


ये 10 टिप्स आपके वर्कआउट के टारगेट को हासिल करने के लिए हमेशा फायदेमंद रहेंगे और इनसे आपके एक्सरसाइज की निरंतरता बनी रहेगी

हार्ट को हेल्दी रखने के लिए करें ये एक्सरसाइज।

इन्सान का दिल एक तरह की मांसपेशी होता हैं। इस बात से तो सब वाकिफ हैं कि मांसपेशी को मजबूत बनाने के लिए व्यायाम बहुत जरूरी होता हैं। इसलिए जो लोग शारीरिक रूप से ज्यादा एक्टिव रहते हैं, उनका दिल स्वस्थ और मजबूत रहता हैं। आलसी लोगों को दिल के रोगों का खतरा ज्यादा होता हैं। खासकर जो लोग एक जगह पर लंबे समय तक बैठे रहते हैं, उन्हें दिल के दौरे का खतरा अन्य लोगों की तुलना में ज्यादा होता हैं। आज Lifes Fact की इस पोस्ट से हम जानेंगे हार्ट को हेल्दी रखने की एक्सरसाइज के बारे में।

हेल्दी हार्ट के लिए नियमित रूप से ये एक्सरसाइज करें, कार्डियो, एरोबिक व्यायाम, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग

इस तरह से शुरू करें अपनी एक्सरसाइज -

कोई भी व्यायाम करने से पहले यह जरूर जानें कि वर्तमान में आप कितने फिट हैं और उसके लिए आप क्या करना चाहते हैं। 

फिर उस परिस्थिति का अनुमान लगाएं, जिसमें आप नियमित रूप से एक्सरसाइज कर सकें। चाहे फिर वो जिम में ट्रेनर के साथ, बिना ट्रेनर के जिम में, घर पर जिम बना कर या फिर अपने दोस्त के साथ।

दोस्तों एक्सरसाइज सें पहले ये बात हमेशा ध्यान में रखे कि कभी भी जल्द बाजी ना करें, जिसमें खास कर शुरूआत में ही। हमेशा एक लक्ष्य निर्धारित करें और फिर उसे पाने के लिए एक प्लान बना कर अनुशासन के साथ चलें।


हेल्दी हार्ट के लिए नियमित रूप से ये एक्सरसाइज करें -

कार्डियो (एरोबिक व्यायाम) - इसके उदाहरण वॉकिंग, जॉगिंग, और साइक्लिंग हैं, आप इस तरह के व्यायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल कर लें। हमेशा धीरे से शुरू करें और अपनी क्षमता के अनुसार बढ़ाए।

स्ट्रेचिंग - व्यायाम शुरू करने या समाप्त करने पर हल्के से स्ट्रेचिंग करें। यह आपके शरीर को लचीला और फुर्तीला बनाता हैं।


स्ट्रेंथ ट्रेनिंग - यह खास कर मासपेशियों को मजबूत बनाने के लिए की जाती हैं। इसमें आप डंबल्स, प्रतिरोध बैंड या फिर खुद के शरीर के वजन के इस्तेमाल से इस तरह की एक्सरसाइज कर सकते हैं।


जानें कितना व्यायाम करना चाहिए -

स्वस्थ शरीर के लिए सप्ताह में 5 दिन वर्कआउट के लिए बोला जाता हैं। जिसमें प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट की एक्सरसाइज करनी चाहिए। एक समय बाद धीरे - धीरे आप अपने वर्कआउट की संख्या और समय बढ़ा सकते हैं।

व्यायाम को शुरू और खत्म करते वक्त अपनी गति धीमी रखें, आप बीच में अपनी गति बढ़ा सकते हैं। अपने वर्कआउट को हमेशा सेट्स में करे और प्रत्येक सेट और एक्सरसाइज के बीच ब्रेक जरूर लें।


नियमित व्यायाम आपकी इस प्रकार मदद कर सकता हैं -

  1. यह आपको हमेशा कैलोरी बर्न करने में मदद करता हैं।

  2. अपने शरीर के रक्तचाप को कम करने में।

  3. बेड (खराब) कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता हैं।

  4. अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में मदद करता हैं।


एक्सरसाइज के समय सावधानियां -

  1. नए सिरे से व्यायाम करने से पहले हमेशा ट्रेनर की सलाह जरूर लें और उसकी देख रेख में ही करें।

  2. अगर आप हार्ट के मरीज हैं, तो अपने वर्कआउट की चर्चा अपने डॉक्टर से जरूर करें।

  3. एक्सरसाइज करने पर शुरू के 2-3 दिन शरीर में हल्का दर्द होना सामान्य बात हैं। इससे ज्यादा परेशानी होने पर अपने ट्रेनर और डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

अपने चयापचय (मेटाबॉलिज्म) को बूस्ट करें, इन 2 आसान तरीकों से।

इस बात की जानकारी तो सभी को होती हैं कि हमारे शरीर द्वारा किसी कार्य को करने में ऊर्जा की आवश्यकता होती हैं। जिसके लिए हम भोजन करते हैं। इस भोजन से ऊर्जा प्राप्त करने के लिए एक क्रिया होती है, जिसे चयापचय (मेटाबॉलिज्म) कहते हैं। शरीर की सभी क्रियाओं को सही तरीके से पूरा करने के लिए चयापचय क्रिया का महत्वपूर्ण योगदान होता हैं। यह क्रिया 2 चरणों में सम्पूर्ण होती हैं:

  1. अपचय क्रिया - चयापचय क्रिया के दौरान ऊर्जा प्राप्त करने के लिए अणुओ का टूटना अपचय क्रिया कहलाती हैं।

  2. उपचय क्रिया - आवश्यक यौगिकों का कोशिका के द्वारा संश्लेषण।

हमारे चयापचय में भोजन से ऊर्जा प्राप्त करने के अलावा शरीर द्वारा कि जाने वाली सभी क्रियाएं शामिल होती हैं या फिर कह सकते हैं कि ये सब मेटाबॉलिज्म पर निर्भर करती हैं। शरीर में कुछ चीजें होती हैं जो आपके मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करके उसे तेज या धीरे करती हैं। इसमें से कुछ चीजें हमारे नियंत्रण में नहीं होती जैसे - उम्र और जीन।


थायरॉयड की वजह से भी चयापचय क्रिया धीरे पड़ जाती हैं, लेकिन एक बार इसकी स्थिति का पता लगने के बाद इसकी गति और क्षमता को बढ़ाना अपने नियंत्रण में हो सकता हैं।

हमारे शरीर में मासपेशियों कि कोशिकाओं को अन्य कोशिकाओं की तुलना में अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती हैं। इसका अर्थ हैं की हमारी सबसे ज्यादा कैलोरी बर्न मासपेशियों कि कोशिकाओं द्वारा होती हैं, और ये सिर्फ जिम में नहीं बल्कि सामान्य अवस्था में भी होता हैं। हमारी बढ़ती उम्र तो वैसे भी चयापचय की क्रिया को धीमा कर देती हैं। इसलिए वर्कआउट हमारे शरीर के लिए उम्र के साथ और ज्यादा आवश्यक हो जाता हैं।

चयापचय (मेटाबॉलिज्म) को बूस्ट करें,  2 आसान तरीकों से, Lifes Fact

अतः आप अपनी मासपेशियों को इन 2 तरीकों से कसरत करवा कर के अपने मेटाबॉलिज्म को बढ़ा सकते हो -

  1. तेज गति वाले व्यायाम - इसमें आप कोई भी एरोबिक व्यायाम जोड़ सकते हो, या फिर इसमें जुम्बा भी कर सकते हो। इन व्यायामों को अब तीव्र करना हैं, अपनी क्षमता के अनुसार। यह आपको ज्यादा कैलोरी बर्न करने में मदद करेगा। इसमें सिर्फ एक बात का ध्यान रखना हैं की आप व्यायाम में अंतराल ल सकते हो लेकिन तीव्रता बनाएं रखनी होगी। जैसे एक मिनट में कोई भी वर्कआउट तेजी से करें, अपनी पूरी क्षमता के साथ। फिर 2 मिनट के लिए आराम से वॉक करते रहें। इस चरण को 14 - 15 मिनट तक दोहराएं।

  2. ज्यादा वजन उठाना (वेट लिफ्ट्स) - जैसा कि हम जानते हैं कि मासपेशियों की कोशिकाएं अन्य कोशिकाओं की तुलना में अधिक कैलोरी बर्न करती हैं। इसलिए एक हफ्ते में कम से कम 2 बार अपने मांसपेशियों से जुड़े व्यायाम को अच्छे वजन के साथ सेट्स में करें। जैसे शुरुआत में नए लोग 12, 10, 8 के सेट से अपना वर्कआउट करें।


व्यायाम के ये 2 तरीक़े आपके चयापचय को अच्छा करने के साथ आपके पूरे शरीर और मन के लिए फायदेमंद रहेंगे।


ये 10 आदतें बन रही हैं, आपके बढ़ते मोटापे का कारण।

आएं दिन बढ़ते मोटापे से एक बात तो पूरी तरह से सच हैं कि वजन कम करना कोई आसान काम नहीं हैं। हम में से भी कई लोगों का यही मानना हैं कि वजन बढ़ाना आसान काम हैं लेकिन उसे कम करना बहुत मुश्किल। इस तरह की सोच रखने वाले व्यक्ति भी अपने बढ़ते मोटापे कि हकीक़त से भागते रहते हैं। आज के समय में बढ़ते मोटापे का सबसे बड़ा कारण वहीं इन्सान हैं, जो खुद इससे ग्रसित हैं। तकनीकी के बदलते दौर में हमने ऐसी दिनचर्या को अपना लिया हैं, जो हमारे स्वास्थ्य के लिए खतरा बनती जा रही हैं। Lifes Fact के इस लेख से आज हम जानेंगे ऐसी 10 आदतें, जो बन रही हैं हमारे बढ़ते वजन का कारण।

10 आदतें बन रही हैं, बढ़ते मोटापे का कारण, तनाव, खाने के दौरान टी. वी. देखना, एल्कोहल का सेवन, कभी भी और कुछ भी खाने से बचें, रात में पूरी नींद ना लेना, Lifes Fact

बढ़ते मोटापे का कारण हैं, ये 10 आदतें -

  1. तनाव - इसमें कोई संदेह नहीं हैं कि बढ़ते तनाव का स्तर आपका वजन बढ़ा सकता हैं। इस स्थिति के दौरान आपके कमर के आस - पास का वजन ज्यादा बढ़ता हैं। तनाव के दौरान इन्सान हमेशा ज्यादा मात्रा में भोजन कर लेता हैं, जिससे वह मोटापे का शिकार होता हैं। इस लिए तनाव से बचने के सही तरीके ढूंढे और अधिक खाने से बचें।
  2. मीठा सोडा पानी पीने से - खाने के बाद सोडा पीने का चलन अब काफी ज्यादा बढ़ गया हैं। यह आदत आपके वसा के स्तर को बढ़ाती हैं। इसमें पाई जाने वाली मिठास तो और भी ज्यादा सेहत के लिए नुकसानदायक होती हैं।
  3. जल्दबाजी में भोजन करना - भागदौड़ भरी जिंदगी में हम में से कई लोगों ने अपने भोजन की प्रणाली को बदल कर रख दिया हैं। देखा जाए तो हर आयु वर्ग के लोग जल्दी से खाना खाने की आदत अपना चुके हैं। यह आपके खराब पाचन के साथ मोटापे की मुख्य वजह बनती हैं।
  4. कम मात्रा में पानी पीना - जरूरत से कम मात्रा में पानी पीना शरीर में वसा के जमाव को बढ़ाता हैं। इसलिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से शरीर से अतिरिक्त वसा, विषाक्त पदार्थों का निष्कासन हो जाता हैं। इसके साथ हमारी त्वचा भी स्वस्थ रहती हैं और स्मृति शक्ति का विकास होता हैं। एक दिन में कम से कम 8 से 12 गिलास पानी की जरूरत हर इंसान को होती हैं, अतः इतना पानी तो पीना ही चाहिए। पानी की पर्याप्त मात्रा किडनी और लिवर को ठीक तरह से कार्य करने में काफी मदद करती हैं, खास कर मोटे लोगों में।
  5. व्यायाम ना करना - भोजन को पचाने के लिए व्यायाम की मुख्य भूमिका होती हैं। अधिकांश लोग खाना खाने के बाद बैठ जाते हैं या फिर लेट जाते हैं यानि विश्राम की स्थिति में आ जाते हैं। जिससे हमारी पाचन कि क्रिया काफी हद तक प्रभावित होती हैं। ये गंदी आदत हमारे वसा के जमने का कारण बनती हैं। दिन में कम से कम 25 से 50 मिनट तक व्यायाम करना चाहिए। अगर आप जिम नहीं जा सकते तो घर से ही बिना किसी उपकरण के वर्कआउट कर ले या फिर सुबह शाम वॉकिंग की आदत अपना लें।
  6. ब्रेकफास्ट ना करना - नाश्ता दिन का पहला और सबसे महत्वपूर्ण भोजन होता हैं। सुबह लिया जाने वाला यह भोजन हमारे लिए दिन की शुरुआत में ऊर्जा का मुख्य स्रोत होता हैं। इसलिए डायटिशियन और डॉक्टर भी हमे सुबह ज्यादा ब्रेकफास्ट लेने और दिन में कम भोजन करने की सलाह देते हैं। ये वजन घटाने में काफी योगदान देता हैं। ब्रेकफास्ट ना करने की आदत से कब्ज जैसी समस्याएं पैदा हो जाती हैं। सुबह ना किए जाने वाले ब्रेकफास्ट की वजह से लंच जरूरत से ज्यादा ले लिया जाता हैं, और इससे प्रभावित पाचन वसा स्तर को बढ़ाती हैं।
  7. रात में पूरी नींद ना लेना - अभी के दौर में देर रात से सोना और रात में कम सोने की आदत हम में से कई लोगों को हो चुकी हैं। यह इन्सान के स्वभाव को चिड़चिड़ा तो बनाती ही हैं, इसके साथ यह कमर के आस पास के क्षेत्र में मोटापे का कारण भी बनती हैं।
  8. कभी भी और कुछ भी खाने से बचें - काफी लोगों की यह आदत बन जाती हैं कि वे दिन भर कुछ ना कुछ खाते रहते हैं। ऐसे में वे अधिकतर जंक फूड और वसा युक्त भोजन ही खाते रहते हैं। जो शरीर में वसा का जमाव करता हैं। इस तरह की आदत वाले लोग ही मोटापे से अधिक परेशान होते हैं क्योंकि उनकी यह आदत उनका मोटापा बहुत तेजी से बढ़ाती हैं।
  9. एल्कोहल का सेवन - ऐल्कॉहॉल का सेवन सिर्फ कैंसर ही नहीं बल्कि मोटापे का कारण भी बनता हैं। एक सही मात्रा में लिया गया ऐल्कोहॉल आपके लिए वजन नियंत्रण में मदद करता हैं। लेकिन अधिक मात्रा में ली गई शराब आपके खाने की क्षमता को बढ़ाती हैं और आप मोटापे का शिकार हो जाते हो।
  10. खाने के दौरान टी. वी. देखना - खाना खाते समय T.V. और मोबाइल फोन चलाना इन बुरी आदतों में से एक हैं, जिससे वजन बढ़ता हैं। क्योंकि इस दौरान आप जरूरत से ज्यादा खाना खा जाते हैं।

ये 10 आदतें हम में से कई लोगों की दिनचर्या का हिस्सा हैं और कई लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन रही हैं। हाल ही में हुवे लॉकडाउन ने तो काफी लोगों में यह आदतें डाल दी हैं। अगर आप भी अपने मोटापे से परेशान रहते हैं और उसे घटाने के बारे में सोच रहे तो फिर शुरुआत इन आदतों को छोड़ने के साथ से ही शुरू करें नहीं तो ये आपके बढ़ते मोटापे का कारण बन जाएंगी।

सिर की जूं (Head Louse) से छुटकारा पाएं, बस इन आसान तरीकों से।

सिर की जूं (Head Louse) एक प्रकार का परजीवी हैं। जूँ का संक्रमण होना बहुत ही आम बात हैं और यह बहुत लंबे समय से चलता आ रहा हैं। सिर में जुओं के संक्रमण का पता सिर में अधिक खुजली होने से लग जाता हैं। यह बहुत आसानी से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुंच सकती हैं। जूं संक्रमित व्यक्ति से अन्य इन्सान तक व्यक्तिगत संपर्क, कंघी, ब्रश, टोपी या अन्य इसी तरह के कारकों से फैलती हैं।

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जूँ के संक्रमण के अधिक मामले छोटे बच्चों में पाएं जाते हैं, जो स्कूल जाते हैं। ऐसे बच्चों से उनके घर तक जूं फैलने के मामले भी ज्यादा बढ़ते हैं। इस माहौल में रहने वाले इन्सान जूओं की समस्या से ज्यादा परेशान रहते हैं। Lifes Fact के इस लेख से आज हम जानेंगे की सिर की जूं से छुटकारा पाने के लिए क्या करें।


इन तरीकों से घर बैठे छुटकारा पाएं सिर की जूओं से -

  1. Jungle लाइस शैंपू - एक बार में इस्तमाल से 100% जूँ और अंडे को समाप्त करता हैं। यह अंडों को घुटन और डिहाइड्रेट करता हैं। जूओं से तुरंत छुटकारा पाने के लिए घरेलू उपचार के लिए यह बहुत उपयोगी हैं। (अभी यहां से खरीदे)

  2. Mediker एंटी-लाइस शैंपू - यह 50 सालों से विश्वसनीय हैं। प्राकृतिक रूप से 4 धुलाई के साथ बिना किसी दुष्प्रभाव से जूं को निकाले। (अभी यहां से खरीदे)

  3. लाइस ट्रीटमेंट काॅम्ब - जूं की समस्या से छुटकारा पाने के लिए कंघी अब आप घर बैठे भी प्राप्त कर सकते हैं। जिसके नियमित उपयोग से आप जूओं से राहत पा सकते हो। (अभी यहां से खरीदे)

  4. Hairshield एंटी लाइस क्रीम वाॅश - जूं और लीख को हटाने और उन्हें बढ़ने से रोकने के लिए ये क्रीम बहुत उपयोगी हैं। यह जूओं को हटाने के साथ त्वचा को नमी देता और बालों को भी पूर्ण रूप से पोषण प्रदान करता हैं। (अभी यहां से खरीदे)

  5. Medilice एंटी लाइस क्रीम - यह डबल एक्शन फॉर्मूला के साथ काम करते हुवे सिर से जूँ और उसके अंडो को निकाले और निर्जलित करता हैं। (अभी यहां से खरीदे)


उपर दी गई सामग्री का उपयोग कर आप घर बैठे बहुत आसानी से जूं की समस्या से निजात पा सकते हो। इनमे से कुछ चीजें ऐसी हैं, जो एक बार में ही आपके सिर की जूओं को मारकर उनका पूरी तरह से सफाया करें। जूँ मारने के घरेलू इलाज में ये ऊपरी नुस्खे बहुत कारगर और आसान हैं।


यहां समझे जूओं के जीवन चक्र के बारे में -

जूं का जीवन चक्र तीन चरण में पूरा होता हैं, जो कुछ इस प्रकार से होता हैं।


  1. पहला चरण - इस दौरान ये अंडे के रूप में होती हैं, जिसे Nit कहते हैं। जिन्हे लोग आसानी से देख नहीं पाते और उनकी पहचान को ले कर भी भ्रम में रहते हैं। क्योंकि इनका आकार 2-3 मिमी. लम्बा होने के साथ इनका रंग सफेद पीला होता हैं, जिसे लोग अक्सर पानी की बूंद या डैंड्रफ मान लेते हैं।

  2. दूसरा चरण - यह लगभग वयस्क जूं की तरह ही नजर आता हैं। लेकिन इसका आकर वयस्क से कम होता हैं। इसे Nymph कहते हैं और यह मनुष्य का खून चूसना शुरू कर देते हैं, भोजन के रूप में।

  3. तीसरा चरण - इस चरण में जूँ वयस्क हो जाती हैं। इसका रंग हल्का भूरा हो जाता हैं और छह पैर होते हैं। ये इन्सान के सिर पर 30 दिन तक रह सकती हैं। इसी अवस्था में मादाएं अंडे देती हैं।


जूं से पूर्ण रूप से निजात पाने के लिए अपने आस - पास के पूरे माहौल में साफ - सफाई नियमित रूप से करनी चाहिए। खासकर रोगी के कपड़ों को गर्म पानी से धोना चाहिए और उसे साफ और सुखी कंघी का इस्तमाल करना चाहिए।


जानें चेहरे पर दाढ़ी के अलावा इन खास तिलों का महत्व।

लड़का हो या लड़की चेहरे पर तिल तो लगभग सबके होता हैं। जो उनके चेहरे की शोभा बढ़ाने के साथ - साथ उनके किस्मत और उनके व्यवहार को अच्छे से दर्शाता हैं। इन तिलों का अपने आप में खास महत्व होता हैं। इससे पिछले लेख में हमने आपको बताया था कि दाढ़ी यानि ठोड़ी पर उपस्थित तिल इन्सान के क्या रहस्य बतलाता हैं। इसकी लिंक नीचे दी गई हैं।

क्या आपकी ठोड़ी पर भी हैं तिल?

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आज की इस पोस्ट से हम बात करेंगे चेहरे के अलग - अलग हिस्सों पर स्थित तिलों के बारे में और जानेंगे उनका खास महत्व।

जानें क्या कहते हैं चेहरे पर ये तिल -

  • ऊपरी होठों पर तिल - ऊपरी होंठ पर तिल किसी के गर्म व्यक्तित्व की और इशारा करता हैं। जो देखा जाएं तो सभी के लिए अच्छा है। अगर तिल ऊपरी होठों के अंदरूनी भाग पर स्थित हो तो वह व्यक्ति रहस्य से भरी शक्तियों और मंत्रों में अच्छा हो सकता हैं।

  • निचले होठों पर तिल - अधिकतर शरीर के इस स्थान पर तिल जिन लोगों के लिए होता हैं वे खानपान में अधिक रूचि रखने वाले होते हैं। इस तरह के लोग अभिनय से जुड़े क्षेत्रों में भी अत्यधिक रुचि रखते हैं। अगर तिल व्यक्ति के निचले होठ के अंदरूनी हिस्से पर हैं तो वह इन्सान शराबी और बुरी आदतों से ग्रसित हो सकता हैं। ऐसे लोगों का झुकाव बुरे कामों की तरफ जल्दी हो जाता हैं।

  • गालों पर तिल - जिन लोगों के गाल पर तिल होता है ऐसे लोग अत्यधिक संवेदनशील किस्म के होते हैं। ऐसे लोग अपने लाइफ पार्टनर से ज्यादा प्यार करते हैं और इनकी लव लाइफ बहुत अच्छी होती हैं। इन लोगों पर अच्छे स्वास्थ्य और लंबी आयु का आशीर्वाद होता हैं। उनके परिजनों को भी अधिक सम्मान मिलता हैं।

  • बाएं गाल पर तिल - अगर तिल व्यक्ति के बाएं गाल पर हैं तो ऐसा व्यक्ति अंतर्मुखी लेकिन अभिमानी होगा। ऐसे इंसानों का जीवन बाधाओं से भरा होता हैं।

  • जीभ के बीच में तिल - जिन लोगों के बीच में तिल होता है ऐसे लोगों के शिक्षा के क्षेत्र में समस्याएं उत्पन्न होती है। ऐसे लोग कभी तेज तरार के साथ बात नहीं कर पाएंगे। स्वास्थ्य से संबंधित काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता हैं। यदि तिल जीभ की नोक पर होता हैं तो ऐसे व्यक्ति काफी बुद्धिमान होते हैं। ये अच्छा खाना - पीना पसंद करते हैं।

  • नाक पर तिल - अगर तिल नाक के सिरे पर उपस्थित होता है ऐसे लोग त्वरित बुद्धि और तेज स्वभाव वाले होते हैं। यदि तिल नाक के दाईं और स्थित है तो ऐसे इंसान कम मेहनत में अधिक धन कमाने में सक्षम होते हैं। ये उच्च लोग होते है, जिनमें स्वाभिमान भी भरा होता हैं। अगर तिल किसी की नाक के बाईं ओर स्थित होता हैं तो उन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता हैं।

सारांश - ये तिल इन्सानों के बर्ताव और उनकी किस्मत के रहस्य को बताने में काफी अच्छी भूमिका निभाते हैं। मुझे उम्मीद है आपको इन तिलों का महत्व समझ आया होगा। दोस्तों कई बार ऐसा भी होता हैं कि ये तिल वक्त के साथ फीके भी पड़ जाते हैं, Lifes Fact के साथ जुड़े रहिए और जानिए लाइफ से जुड़े ऐसे फैक्ट्स के बारे में।

जानें अनुलोम - विलोम (नाड़ी शोधन) के बारे में।

अनुलोम विलोम प्राणायाम के मुख्य प्रकारों में से एक हैं। जिसे आमतौर पर या दूसरी भाषा में नाड़ी शोधन भी कहा जाता हैं। इस प्राणायाम का नाम दो शब्दों से मिलकर बना हैं जिसमें अनुलोम का अर्थ "सीधा" विलोम का अर्थ "उल्टा" होता हैं। यह प्राणायाम नाड़ियों को शुद्ध करके हमारे शरीर में ऑक्सीजन के स्तर को बढ़ाता है। जिससे थकान, आलस, सुस्ती दूर होकर शरीर चुस्त और ऊर्जावान रहता हैं। इस प्राणायाम का निरंतर अभ्यास शरीर की सभी बंद नाड़ियों को खोलने और मन को शांत बनाए रखने में मदद करता हैं। उपरोक्त सभी फायदों के लिए आज हम जानेंगे नाड़ी शोधन प्राणायाम करने का सही तरीका और इसे करते समय रखना हैं किन बातों का ध्यान।

 

Lifes Fact - जानिए अनुलोम विलोम प्राणायाम - करने का सही तरीका और उचित समय, लाभ, सावधानियां सब कुछ।

अनुलोम विलोम करने का सही तरीका और उचित समय -

  1. इस आसन को करने के लिए सबसे उचित समय वह माना जाता हैं जब आप खाली पेट हो।

  2. अब जमीन पर पद्मासन, सिद्धासन या वज्रासन में से किसी भी आसन की स्थिति में बैठ जाए। इसमें पद्मासन सबसे उत्तम है।

  3. अब बाएं हाथ को घुटने पर टिका कर इस हाथ से चिन मुद्रा बना लें।

  4. दाहिने हाथ के अंगूठे से दाहिने नथुने को बंद करें और बाएं नथुने से धीरे - धीरे सांस लें।

  5. अब हाथ ही रिंग फिंगर से बाएं नथुने को बंद कर ले और दाहिने नथुने से धीरे-धीरे सांस छोड़ें।

  6. अब दाहिने नथुने से सांस लेकर उसे बाएं नथुने से धीरे-धीरे छोड़ें।

  7. इसी तरह अनुलोम - विलोम प्राणायाम का यह एक क्रम पूरा हुआ।

अनुलोम-विलोम प्राणायाम में रखें इन बातों का ध्यान और बरतें निम्न सावधानियां -

  1. इस प्राणायाम के दौरान सांस को 5 सेकंड से अधिक ना रोकें।

  2. अनुलोम विलोम प्राणायाम हमेशा खाली पेट करें। जिसमें सुबह या सूर्यास्त का समय उचित हैं।

  3. दोपहर के भोजन के या किसी भी भोजन के 3 घंटे के बाद ही यह प्राणायाम करें।

  4. अस्थमा और दिल के रोगियों को इस प्राणायाम में एक प्रशिक्षक की मदद जरूर लेनी चाहिए।

अनुलोम विलोम से होने वाले लाभ और फायदे -

  1. यह प्राणायाम फेफड़ों को मजबूत करता है और इससे श्वसन तंत्र सुधरता हैं।

  2. यह प्राणायाम नाडिया‌ं शुद्ध करता हैं, इसलिए इसे नाड़ी शोधन प्राणायाम कहते हैं।

  3. यह शारीरिक और मानसिक तनाव को कम करता है और इससे दिल की गंभीर समस्याओं के लिए बेहतरीन प्राणायाम माना जाता हैं।

  4. इसका निरंतर अभ्यास रक्त परिसंचरण में सुधार लाता हैं और चेहरे की चमक की बढ़ाता हैं।

  5. प्रतिदिन अनुलोम विलोम करने से खर्राटे की समस्या से भी राहत मिलती हैं।

  6. यह प्राणायाम विद्यार्थियों के साथ बड़ों को भी एकाग्र रहने में मदद करता हैं।

  7. शरीर के तापमान को सही बनाए रखने के साथ यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी सुधारता हैं।


Note - अनुलोम - विलोम (नाड़ी शोधन) प्राणायाम को उपरोक्त तरीके से ही किया जाता है और इन्हीं बातों का विशेष रुप से ध्यान रखा जाता हैं। निरंतर रूप से इस प्राणायाम को करने से व्यक्ति को उपरोक्त फायदे होते हैं ।