World AIDS Day 2021: HIV/AIDS को कैसे हराया जाए?

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इस बात से तो सब वाकिफ है कि HIV को हराना आसान नहीं है। इस बात की पुष्टि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी करता है। प्रतिवर्ष 10 लाख लोग HIV से मर जाते हैं, क्योंकि अधिकतर लोगों को तो पता भी नहीं होता कि वे पीड़ित है या फिर उनका इलाज़ देर से होता है। जिस तरह कोरोना महामारी ने पिछले 24 महीनो से भी अधिक समय तक जन-जीवन को प्रभावित किया है, उसी तरह डर, नजरअंदाज और कलंक के कारण 1980 के दशक में विश्व में HIV महामारी ने प्रभावित किया था।

एचआईवी (HIV) रोग के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष 1 दिसंबर को ‘विश्व एड्स दिवस (World AIDS Day)’ मनाया जाता है। वर्ष 2021 में विश्व एड्स दिवस “End inequalities. End AIDS” थीम के साथ मनाया जा रहा है। UN एड्स के अनुसार इस महामारी के शुरुआत (वर्ष 1988) से आज की तिथि तक 79.3 मिलियन लोग HIV से संक्रमित हो चुके हैं। एचआईवी प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर करता है व पोषक तत्वों के सेवन या अवशोषण को बाधित करके पोषण संबंधी स्थिति को कमजोर करता है। 


HIV/AIDS को हराना क्यों मुश्किल है?

UN एड्स ने बताया कि वर्ष 1997 में विश्व में उच्च स्तर पर पहुँचने के बाद नए HIV संक्रमण में 52% की कमी आई है। वर्ष 1997 में 3.0 मिलियन लोग संक्रमित हुए थे, जिसकी तुलना में वर्ष 2020 में लगभग 1.5 मिलियन लोग एचआईवी से संक्रमित हुए थे। इसके साथ वर्ष 2010 के बाद बच्चों के मामले में संक्रमण दर में 53% की गिरावट आई है।

वर्ष 2020 में इस बीमारी के साथ जीने वाले लोगों कि संख्या 37.7 मिलियन थी, जिसमें 6,80,000 लोग एड्स और इससे संबंधित बीमारियों से मारे गए। यह वो स्थिति है, जब वर्ष 2030 तक दुनिया एड्स को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार यह लक्ष्य पूरा करने में नए संक्रमण की दर और मौतों का आंकड़ा अभी तक प्रभावी रूप से कम नहीं हो पाया है। HIV की रोकथाम, देखभाल और उपचार सेवाओं तक अपर्याप्त पहुँच इस लक्ष्य को कठिन बना रही है।

HIV/AIDS में भारत की स्थिति:

राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO) की HIV अनुमान 2019 रिपोर्ट के अनुसार देश में 23.48 लाख लोग इस बीमारी के साथ जी रहे थे। इस रिपोर्ट के अनुसार अधिकतर लोग महाराष्ट्र से थे। वर्ष 2019 में नए एचआईवी संक्रमण मामलों की संख्या 69,000 थी और एड्स से मरने वालों की संख्या 59,000 थी।

UN एड्स की कार्यकारी निदेशक विनी ब्यानिमा के अनुसार भारत को एड्स पर नियंत्रण पाने के लिए गर्भवती महिलाओं पर अधिक ध्यान देना चाहिए। सकारात्मक गर्भवती महिला से बच्चे तक संक्रमण फैलने के प्रयासों पर जोर देना चाहिए।


एचआईवी/एड्स को कैसे हराया जाए?

इस बीमारी से लड़ने और नए संक्रमणों को कम करने में पिछले 25 वर्षों से निरोध (Condom) ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके अलावा HIV उपचार के लिए प्रतिदिन ली जाने वाली सिंगल टैबलेट बेहद प्रभावी, सुरक्षित और सुविधाजनक मालूम हुई है। इसने उपचार लागत को कम करने के साथ इस घातक बीमारी को मधुमेह या उच्च रक्तचाप जैसी श्रेणी में बदल दिया।

बदलती तकनीकी और समय के साथ अब HIV / AIDS के लिए प्रतिदिन दवा लेने की जरुरत नहीं होगी। ब्रिटेन में इस तरह की पहल शुरू हो चुकी है, जिससे इस दवा के बदलने दो महीने में सिर्फ एक इंजेक्शन (Injection) लगवाना होगा। इसका नाम केवेनुआवा (Cabenuva) है, जो दो दवाओं कोबोटेग्रेविर के साथ रिलपिवरिन (cabotegravir with rilpivirine) से बनी है।


मुख्य रूप से HIV / एड्स को बढ़ावा डर, नजरअंदाज और कलंक के कारण मिला है। लोग इस बारे में उपचार लेने से भी कतराते है। इस सोच को बदलने के लिए स्कूलों के साथ अगर समुदाय स्तर पर एड्स के प्रति जागरूकता फैलाना आवश्यक है ताकि अधिक से अधिक लोग इस घातक बीमारी के प्रति जागरूक हो।


Dental health: क्या आप सही तरीके से अपने दांतों को ब्रश कर रहे हैं?

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एक टूथब्रश को अधिकतम तीन महीने तक उपयोग मे लाया जा सकता है। अगर आप अधिक रगड़-रगड़ कर ब्रश करते हैं तो आपको दन्त चिकित्सक के अनुसार इसे जल्दी बदल देना चाहिए क्योंकि इससे Tooth Brush के ब्रिसल्स बहुत जल्दी खराब हो जाते हैं, जो आपके Dental health के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

दांतों की अच्छी देखभाल और लंबे समय तक रख-रखाव के लिए अपने दांतों की नियमित रूप से सफाई करना अनिवार्य है। दिन में 2 बार हमें अपने दांतो की सफाई करनी चाहिए और कम से कम दो मिनट इसके लिए दिए जाने चाहिए। हालंकि, इस तरह की दिनचर्या का पालन करने बावजूद भी लोग डेंटन से जुड़ीं समस्याओं जैसे संवेदनशीलता, Plaque और दांतों के नुकसान की शिकायत करते हैं। 

इसका मुख्य कारण है अपने दातों को जोर से ब्रश करना यदि आप भी ऐसा करते हैं तो इसे तुरंत बंद कर दीजिए। जल्दबाजी में रहने वाले लोगों को दांतों से जुड़ी समस्याएँ अधिक सामने आती है क्योंकि कम से दांतों की अच्छी सफाई के लिए वे दांतों को अधिक दबाव से ब्रश करते हैं। 

दन्त चिकित्सक डॉ. रेड्डी के अनुसार Tooth brushing के तीन संभावित कारण निम्नलिखित है:

  • हाथ का अत्यधिक प्रभावी दबाव।
  • जरूरत से ज्यादा ब्रश करना।
  • टूथब्रश के अपघर्षक ब्रिसल्स कारण।

डॉ रेड्डी के अनुसार आक्रामक तरीका और अपघर्षक ब्रिसल्स, दांतों के लिए बहुत बुरा संयोजन है। उन्होंने बताया कि आक्रामक तरीके से ब्रश करने से दंतवल्क (enamel) और दांतों की अन्य परतें खो जाती है। इससे मसूड़ें भी पीछे खिसक जाते हैं और दांतों पर उनकी पकड़ कम हो जाती है।

इसके अलावा इससे आपके दांतों में सड़न पैदा हो सकती है और दांत जल्दी गिर सकते हैं। गर्म, ठन्डे और मीठे भोजन के प्रति संवेदनशीलता (Sensitivity) भी एक दुष्प्रभाव है। यह सब दर्शाता है की आप ओवरब्रशिंग कर रहे हैं।

ओवर ब्रशिंग के दुष्प्रभाव:

  • मसूड़ों का घटना
  • दांतों का संवेदनशील होना
  • मसूड़ों का क्षतिग्रस्त होना व खून आना

हमेशा हल्के दबाव से ही ब्रश करें और अपने टूथब्रश को तीन महीने के भीतर बदलें क्योंकि लंबे समय तक एक ही ब्रश के उपयोग से ब्रिस्टल भुरभुरा हो जाता है और इसकी प्रभावशीलता भी कम हो जाती है। वयस्कों को टूथपेस्ट के रूप में 'फ्लोराइड टूथपेस्ट' का उपयोग करना चाहिए लेकिन बच्चों को इसकी पहुँच से दूर रखना चाहिए।

डेंटल हेल्थ (Dental Health) के लिए जीवन में हमेशा निरंतरता बनाए रखनी चाहिए। एक अच्छे दिन कि शुरुआत ब्रश करने से ही होती है। दिन में 2 बार 2 मिनट के लिए सही तरीके से किया गया ब्रश आपको जीवन भर अच्छा दन्त स्वास्थ्य और मुस्कान प्रदान करता है।


ये 4 प्रकार की Exercise's आपके स्वास्थ्य और शारीरिक क्षमता को बढ़ा सकती है।

लंबे समय तक काम करना "सबसे घातक व्यावसायिक जोखिम कारक हैं" – एडनॉम घेब्येयियस, WHO

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जब Exercise की बात आती है तो अधिकतर लोग एक ही प्रकार की एक्सरसाइज करते हैं। उन्हें लगता है कि उनको स्वस्थ रखने के लिए यह एक व्यायाम पर्याप्त है। लेकिन शोध या वर्तमान तक किए गए Survey के अनुसार चार प्रकार के व्यायाम महत्वपूर्ण है।

यह चार प्रकार के व्यायाम धीरज (Endurance), शक्ति (Strength), संतुलन (Balance) और लचीलापन (Flexibility) हैं। इन सभी Activities के अलग-अलग फायदे हैं। खास बात यह है कि इन गतिविधियों के लिए कोई समय सीमा और उम्र तय नहीं है।

UN की रिपोर्ट के अनुसार हर साल करीब 20 लाख लोगों की मौत (Death) उनके काम से संबंधित बीमारियों और चोटों (Work-related illnesses and injuries) से होती है। सिर्फ लंबे समय तक काम करना भी आपके स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर डालता है। वर्तमान में चल रही महामारी जैसी स्थिति में तो कामकाजी लोगों के लिए अब स्वस्थ रहना और चुनौती भरा हो गया है। इसलिये आइए इस लेख द्वारा समझते हैं कि किस प्रकार से ये 4 तरह की एक्सरसाइज आपके स्वास्थ्य और शारीरिक क्षमता को बढ़ा सकती हैं -

Endurance (धीरज) -

इस तरह के व्यायाम आपकी श्वास और हृदय गति को बढ़ाती है, इन्हें आमतौर पर Aerobic कहा जाता है। ये आपकी फिटनेस में सुधार लाती है और आपको स्वस्थ रखने में मदद करती है।
इससे आपको रोजमर्रा के कार्यों को करने में मदद करती है।
Endurance workouts कई बीमारियों जैसे मधुमेह, स्तन कैंसर, हृदय रोग और अन्य वृद्ध वयस्कों की बीमारियों में रोकथाम का कार्य कर सकते हैं। इनमें निम्नलिखित Exercises शामिल है -

  • चलना (Walking)
  • दौड़ना या जॉगिंग (Running)
  • नृत्य करना (Dancing)
  • तैराकी (Swimming)
  • रस्सी कूदना (Skipping)

Strength (शक्ति) -

मांसपेशियों में ताकत का होना आपकी जीवनशैली में अच्छा बदलाव ला सकती है। मजबूत मांसपेशियां आपको स्वतंत्र रहने में मदद करती हैं और रोजमर्रा की गतिविधियों को आसान बनाती हैं, जैसे कुर्सी से उठना, सीढ़ियां चढ़ना और किराने का सामान ले जाना। अपनी मांसपेशियों को मजबूत बनाए रखने से संतुलन में मदद मिलती रहती है।

अधिकतर लोग मजबूत मांसपेशियों के लिए वजन उठाना शुरु करते हैं। जो सही भी है लेकिन वे अक्सर वजन चुनने में गलती कर देते हैं। हमेशा हल्के वजन से शुरुआत करें और अपनी जरुरत के हिसाब से ही भारी वजन उठाना शुरु करे। यदि आप बिल्कुल नए हैं तो आप प्रतिरोध बैंड, खिंचाव वाले इलास्टिक बैंड का उपयोग कर सकते हैं। मांसपेशियों की ताकत बढ़ाने के लिए आप निम्नलिखित व्यायाम कर सकते हैं -

  • भार उठाना (Weight Lifting)
  • पुश-अप्स (Push Ups)
  • Plank
  • पुल अप (Pull up)
  • अपने शरीर का वजन उठाना वाली कसरत
  • Arm Curl
  • Leg Curl
  • Lunges
  • Squates

Balance (संतुलन) -

Balancing Excercise's आपको गिरने से बचाती है, वृद्ध लोगों में इस आम समस्या के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। शरीर के निचले हिस्से की ताकत वाले व्यायाम भी आपके संतुलन में सुधार करेंगे। निम्नलिखित संतुलन अभ्यास आपको Balance बनाने में मदद करेंगे -

  • एक पैर पर खड़ा होना
  • एड़ी पर चलना
  • पंजों पर चलना
  • बैठने की स्थिति से खड़े होने का अभ्यास
  • Shoulder Rolls

Stretching (स्ट्रेचिंग) -

इस तरह के अभ्यास से आपके शरीर में लचीलापन बरकरार रहता है। अधिकतर लोगों को बढ़ती उम्र में शरीर के अकड़न की शिकायत रहती है। यह बहुत बार देखा गया है कि लोग आम दिनचर्या के कार्य जैसे झुकने, खड़े–खड़े जूते पहनने में और अन्य शारीरिक रूप से सक्रिय कार्यों को करने के दौरान अकड़न की समस्या से परेशान रहते हैं। इस तरह की समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए ये गतिविधियाँ सहायता करेंगी -

  • बैक स्ट्रेच एक्सरसाइज
  • पैर के पिछले हिस्से में खिंचाव
  • Frog Stretch
  • Triceps Stretch
  • काफ मसल्स को तान कर

निष्कर्ष -

अगर आप भी सप्ताह में 55 घंटे या उससे अधिक काम करते है तो आपको अपने अच्छे स्वास्थ्य के लिए आज से सजग हो जाना चाहिए। उपर्युक्त 4 Exercise's, हर आयु के लोगों के लिए उपयोगी है। आप इन एक्सरसाइज को अपनी उम्र और क्षमता के अनुसार कर सकते हैं। इनमें शामिल व्यायाम बिना उपकरणों और उपकरणों के साथ भी किए जा सकते हैं।

प्रोटीन (Protein) की कमी से क्या होता है?

आइए जानते हैं Protein के बारे में

दोस्तों, प्रोटीन (Protein) की जरूरत आपके वजन और आपके द्वारा ली गई कैलोरी की मात्रा पर निर्भर करती है आपके कुल कैलोरी का 20 से 35 प्रतिशत भाग प्रोटीन से आना चाहिए यानि यदि हर दिन आप 2,000 कैलोरी लेते हैं, तो उसमें से 600 कैलोरी प्रोटीन से प्राप्त होना चाहिए।

बेहतर स्वास्थ्य और सेहत के लिए सिर्फ खाना ही काफी नहीं  है बल्कि उसमें पर्याप्त पोषण का होना भी बेहद जरूरी है। हमारे शरीर के लिए आवश्यक पोषक तत्वों में से एक है प्रोटीन। आज के इस लेख के माध्यम से हम प्रोटीन (Protein) से सबंधित जानकारी प्राप्त करेंगे। मुख्य रूप से इस बात की गंभीरता को भी समझेंगे कि Protein कमी होने पर आपको सेहत से जुड़ी किन परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है?

प्रोटीन (Protein) क्या होता है?

प्रोटीन का गठन कार्बन, हाइड्रोजन, आक्सीजन एवं नाइट्रोजन तत्वों के अणुओं से मिलकर होता है। कुछ प्रोटीन में इन तत्वों के अतिरिक्त आंशिक रूप से गंधक, जस्ता, ताँबा तथा फास्फोरस भी पाया जाता है।

प्रोटीन की कमी से क्या होता है?

Protein की कमी होने पर हमें निम्न समस्याओं का सामना करना पड़ता है -

  •       जोड़ों में अकडऩ के साथ-साथ मांसपेशियों में भी दर्द की समस्या बढऩे लगती है।
  •       हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता घटने लगती है।
  •       शरीर में थकान और शारीरिक कमजोरी महसूस होती है।
  •       बाल और नाखूनों पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। हमारे शरीर में बालों और नाखूनों से जुडीं अधिक समस्याएँ प्रोटीन की कमी के कारण होती है।
  •       इसकी कमी से बच्चों की लंबाई बढ़ना रुक जाती है।
  •       चेहरे पर सूजन आ जाती है।

क्या है प्रोटीन की कमी के लक्षण

  •          प्रोटीन की कमी से जोड़ों में मौजूद तरल पदार्थ का निर्माण कम होने लग जाता है।
  •          कम मात्रा में प्रोटीन लेने से शरीर में सफेद रक्त कोशिकाओं की संख्या कम होती जाती है और हीमाग्लोबिन भी कम हो जाता है।
  •         रक्त में शर्करा का स्तर कम होना।
  •          प्रोटीन की कमी के कारण बार-बार भूख लगती है।
  •          नाखूनों और बालों से सबंधित समस्याएँ प्रोटीन की कमी से उत्पन्न होती हैं।
  •          शरीर में थकान और दर्द की समस्या आना, इसके अलावा बार-बार बीमार पड़ना भी प्रोटीन की कमी के संकेत है। इसके पीछे का कारण प्रतिरोधक क्षमता में कमी आना है


प्रोटीन की कमी दूर कर सकते हैं ये खाद्य पदार्थ

दूध का सेवन

कैल्शियम और विटामिन डी की प्रचुर मात्रा से भरपूर दूध प्रोटीन का एक अच्छा स्रोत माना जाता है। इसलिए अपनी रोजाना की डाइट में एक ग्लास कम वसा वाले दूध को शामिल करें। इसके अलावा, दूध से बने अन्य उत्पाद जैसे पनीर और दही को भी अपने आहार में शामिल कर सकते हैं।

साबुत अनाज और दाल का सेवन

प्रोटीन की कमी होने पर शाकाहारी लोगों के लिए साबुत अनाज और दाल प्रोटीन के अच्छे स्रोत है।

बीन्स और सी फूड का सेवन

बीन्स और सी फूड में प्रोटीन की अधिक मात्रा पाई जाती है। इसके अलावा इसमें फाइबर भी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।

अखरोट का सेवन

यह प्रोटीन का एक अच्छा स्त्रोत माना जाता है। Protein के अलावा इसमें विटामिन बी कॉम्प्लेक्स, आयरन, मैग्नीशियम, कॉपर और जिंक भी काफी मात्रा पाए जाते हैं।

अंडा

प्रोटीन के लिए अंडा सबसे अच्छा स्रोत माना जाता है। आप इसे अपनी डाइट प्लान में प्रतिदिन के हिसाब से शामिल कर सकतें हैं।

अधिक मात्रा में प्रोटीन का सेवन

ज्यादातर लोग सोचते हैं कि जब प्रोटीन की कमी से शरीर से इतने नुक्सान है तो क्यो ना अधिक मात्रा में प्रोटीन का सेवन किया जाए। इसलिए आपको बता दें कि अधिक मात्रा में प्रोटीन का सेवन भी शरीर के लिए नुकसानदेह है। इससे शरीर में कीटोन की मात्रा बढ़ जाती है जिसे उत्सर्जित करने में शरीर को अधिक मेहनत करनी पड़ती है। इसके अलावा शरीर में कब्ज, हृदय रोग और कैंसर जैसी घातक बीमारियाँ हो सकती हैं।

ब्लैक फंगस: जानें म्यूकर माइकोसिस के लक्षण और इससे बचने के तरीके।

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कोरोना महामारी के साथ अब ब्लैक फंगस (Black Fungus) यानी म्यूकरमाइकोसिस (Mucormycosis) ने भी दखल दे दी है। ऐसी स्थिति में डॉक्टरों ने भी लोगों को ब्लैक फंगस के शुरुआती लक्षणों को पहचानने की सलाह दी है ताकि समय रहते इसके गंभीर प्रभाव से बचा जा सकें। इसके मरीज महाराष्ट्र, दिल्ली, मध्यप्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना, बिहार, उत्तर प्रदेश के अलावा राजस्थान के जोधपुर शहर में भी देखे गए हैं। अगर समय रहते इसके लक्षणों को नहीं पहचाना जाएं तो यह बीमारी विकट रूप धारण कर सकती है। जिसके चलते यह नाक, साइनस, आंखों या दिमाग में क्षति पहुंचा सकता है और कई ऐसे मामले आए हैं, जिसमें कोरोना पीड़ित की जान बचाने के लिए आँख तक निकालनी पड़ी है। विशेष रूप से कमजोर इम्यूनिटी वालो को ब्लैक फंगस के संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है।

आज Life’s Fact के इस लेख से हम जानेंगे कि कैसे ब्लैक फंगस के लक्षणों की पहचान की जाए ताकि समय रहते हम इसके संक्रमण के खतरे को कम कर सकें।

ब्लैक फंगस यानी म्यूकर माइकोसिस क्या है?

यह एक ऐसा फंगल इंफेक्शन है जिसमें कोरोना वायरस उत्प्रेरक का काम करता है। क्योंकि ये संक्रमण उन लोगों में आसानी से फैल जाता है, जिनका इम्यूनिटी सिस्टम कमजोर होता है। इसके अलावा पहले से किसी ना किसी बीमारी से जूझ रहे हैं लोगों में भी इसके इंफेक्शन का खतरा ज्यादा होता है। यह इन्फेक्शन नाक से शुरू हो कर आंखों और मस्तिष्क तक पहुँच जाता है और आत्मघाती साबित होता है। हाल ही में Covid-19 के दौरान चर्चा में आने वाली यह बीमारी कोई नयी नहीं है बल्कि बहुत दुर्लभ है लेकिन एक बार अस्तित्व में आने के बाद यह तेजी से फैलती है।

ब्लैक फंगस के लक्षण

ब्लैक फंगस (Black Fungus) को पहचानने के लिए कई तरह के लक्षण मुख्य रूप से देखे जाते हैं -

1. इसके लक्षण के तौर पर आंखों में लालपन या दर्द होने से इसकी पहचान की जा सकती है।

2. यह संक्रमण आंख की नसों को बुरी तरह से प्रभावित कर देता है, जिससे आंखों में कई तरह की दिक्कतें आ सकती है।

3. कोरोना की तरह इस संक्रमण के दौरान भी सांस में तकलीफ होती है।

4. सिरदर्द, खांसी के साथ बुखार से इसकी पहचान की जा सकती है।

5. उल्टी में खून का आना या मानसिक स्थिति में बदलाव भी इस इन्फेक्शन का कारण बनता है।

उपर्युक्त लक्षणों को देखा जाए तो कोरोना वायरस और अन्य बीमारियों से मिलते हैं पर माहौल को देखते हुए इन लक्षणों पर हमें बारीकी से गौर करना चाहिए। KOH टेस्ट और माइक्रोस्कोपी के द्वारा ब्लैक फंगस (Black Fungus) के संक्रमण को पहचान सकते हैं।

कैसे फैलता है ब्लैक फंगस?

वातावरण में फैले रोगाणुओं के संपर्क में आने से कोई भी व्यक्ति फंगल इंफेक्शन का शिकार हो सकता है। यह त्वचा पर चोट, खरोंच या जले हुए हिस्सों से ये शरीर में प्रवेश कर सकता है। कुछ खास परिस्थितियों में ब्लैक फंगस (Black Fungus) मरीज की स्किन पर भी विकसित हो सकता है।

ब्लैक फंगस से बचाव के तरीके?

दुर्लभ तरह का फंगल इन्फेक्शन होने के कारण हमें सामान्य समय में इस वायरस से चिंतित होने की जरुरत नहीं है लेकिन कोविड-19 से ग्रस्त मौजूदा हाल में ब्लैक फंगस से बचने के लिए निम्न तरीकों को अपना कर चलना चाहिए।

1. म्यूकर माइकोसिस (ब्लैक फंगस ) से बचने के लिए धूल, मिट्टी वाली जगहों पर मास्क पहनकर रखें।

2. काई, खाद जैसी चीजों के नजदीक जाते वक्त अपने शरीर को जूते, ग्लव्स, लंबी आस्तीन की शर्ट और ट्राउजर से ढके।

3. घर के साथ आस-पास की साफ-सफाई का भी विशेष रूप से ध्यान रखें।

4. प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत बनाए और ब्लड शुगर (हाइपरग्लाइसीमिया) पर कंट्रोल रखें, अत: खानपान का विशेष कर ध्यान रखें।

5. ऐसे समय में स्टेरॉयड के कम से कम इस्तेमाल से इससे बचा जा सकता है।

6. कोरोना से रिकवरी के बाद भी ब्लड ग्लूकोज का लेवल मॉनिटर करते रहें।

7. सांस सबंधित समस्या में ऑक्सीजन थेरेपी के दौरान ह्यूमिडिटी फायर के लिए साफ पानी का ही इस्तेमाल करें।

चिकित्सकों के अनुसार ब्लैक फंगस के लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें क्योंकि इससे बचने के लिए इसके लक्षणों की पहचान करना बहुत जरुरी है। बंद नाक वाले सभी मामलों को हल्के में ना ले और Covid-19 के मामले में अधिक सावधानी रखें। कोरोनावायरस से रिकवरी के बाद भी फंगल इंफेक्शन एक सप्ताह या महीने भर बाद उभर सकता है। अधिक जानकारी के लिए सब्सक्राइब करें Life's Fact को और अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर दें।

Covid-19: इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए क्या खाएं और कब तक खाएं?

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कोरोना वायरस (Corona Virus) की दूसरी लहर (Second Wave) ने पूरे देश की हालत ख़राब करके रखी है। आए दिन कोरोना से संक्रमित मरीजों की संख्‍या बढ़ती जा रही है और मृत्युदर में प्रतिदिन बढ़ोतरी हो रही है। कोरोना से बचने के लिए पूरे विश्व में एक ही धारणा लागू है कि सुरक्षा ही बचाव है। इसलिए लोगों ने कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए मास्क, हैंड सेनेटाइजर के साथ-साथ अपनी इम्युनिटी पर भी ध्यान दे रहे हैं। अपने प्रतिरक्षा तंत्र (Immunity System) को मजबूत बनाने के लिए लोग अलग अलग तरीके अपना रहे हैं। आयुर्वेदिक दवाओं के साथ ज्यादातर लोगों ने विटामिन डी 3 (Vitamin D3), कैल्शियम (Calcium), जिंक (Zinc) और मल्टी विटामिन (Multivitamin) लेना भी शुरू कर दिया।


इम्यूनिटी बूस्टर (Immunity Booster) के लिए उपलब्ध दवाओं का सेवन तो लोगों ने शुरू कर दिया है लेकिन इस बात से सब अनभिज्ञ है कि उन्हें यह दवाएं कितने दिन तक लेनी है। आज के Lifes Fact के इस लेख से हम जानेंगे कि कोरोना वायरस से बचने के लिए इम्यूनिटी बूस्ट करने के लिए किन दवाओं का सेवन करें और कब तक करें?


  • विटामिन सी, डी और मल्टी विटामिन - इम्यूनिटी बूस्ट करने के लिए और कोविड -19 के खतरे को कम करने के लिए विटामिन सी, डी और मल्टी विटामिन काफी सहायक है लेकिन इन दवाओं को लेने का कोर्स केवल एक महीने का ही होता है। 1 माह से ज्यादा वक़्त तक बिना डॉक्टर कि सलाह से इन दवाइयों का उपयोग करने से आपको बहुत सारे साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं।
  • जिंक (Zinc) - जिंक की हल्की कमी से प्रतिरोधक क्षमता में कमी आ सकती है और इसकी अनुपस्थिति से हड्डियां भी कमजोर पड़ सकती हैं। यह पुरुषों के लिए बेहद आवश्यक मिनरल है क्योंकि यह एंटीऑक्सीडेंट और हार्मोन्स को बैलेंस करने का कार्य करता है।
  • च्‍यवनप्राश और आयुर्वेदिक दवाइयां - जरूरत से ज्यादा च्‍यवनप्राश का सेवन करने से लोगों में शुगर और दिल से सबंधित बीमारियां बढ़ रही है और इसके अलावा अत्यधिक मात्रा में विषेशज्ञ की सलाह के बिना आयुर्वेदिक दवाओं का सेवन आपके लिए हानि कारक साबित हो सकता है।

शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए उपर्युक्त मेडिसिन्स कोरोना महामारी के समय में बहुत ही उपयोगी है लेकिन बिना विशेषज्ञ या सामान्य जानकारी के बिना ये दवाएं आपके लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। अतः ऐसी दवाइयों का सेवन इनके कोर्स के अनुसार ही करें।

कोरोना वायरस: जानें ऑक्सीजन लेवल कैसे बढ़ाएं?

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भारत में कोरोना के कुल केस दो करोड़ के भी पार हो चुके हैं। लाखों की संख्या में आने वाले नए केस से चिकित्सा व्यवस्था भी गड़बड़ा गई है। कोरोना वायरस की दूसरी लहर का प्रकोप भारत पर खतरनाक साबित हुआ है। ऐसे समय में मरीजों के लिए सबसे बड़ी समस्या रही है ऑक्सीजन की किल्लत।


देश में ऑक्सीजन की कमी के कारण ही कोरोना के मरीजों की मौतों का आंकड़ा बढ़ रहा है। आए दिन समाचारों में कोविड-19 के मरीजों की मौत का कारण ऑक्सीजन का अभाव बताया जा रहा है। अतः ऐसी परिस्थिति में अपने ऑक्सीजन लेवल को लेकर हमें सजग हो जाना चाहिए। 


आज के इस लेख से हम शरीर में ऑक्सीजन बढ़ाने के बेहतरीन उपायों के बारे में जानेंगे और घरेलू तौर पर ऑक्सीजन से संबंधित मुख्य जानकारी भी प्राप्त करेंगे।


1. ऑक्सीजन लेवल कितना होना चाहिए?

उत्तर - विशेषज्ञों के अनुसार सामान्य व्यक्ति का नार्मल ऑक्सीजन लेवल 95% या उससे अधिक होना चाहिए। अगर कोई व्यक्ति फेफड़े या स्लीप एपनिया जैसी बीमारी से ग्रसित है तो उसका ऑक्सीजन लेवल 90% होना चाहिए।


2. ऑक्सीजन लेवल बढ़ाने के तरीके।

हमारे शरीर में ऑक्सीजन लेवल बढ़ाने के लिए एक्सरसाइज और खानपान की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। आइए समझते हैं कि किस तरह से ये तरीके ऑक्सीजन बढ़ाने में कारगर है -


ब्रीदिंग एक्सरसाइज़ - ऑक्सीजन लेवल को ठीक रखने और उसे बढ़ाने के लिए ब्रीदिंग एक्सरसाइज प्राकृतिक तरीके से काम करती है। इस तरह की एक्सरसाइज के माध्यम से सुबह के वक्त ली गई ताजी हवा फेफड़ों को ऊर्जा देती है। जिससे फेफड़े मजबूत होते हैं और उनकी कार्य क्षमता भी बढ़ती है।


  • अनुलोम-विलोम प्राणायाम - ब्रीदिंग एक्सरसाइज में अनुलोम विलोम प्राणायाम सबसे बेहतर होता है क्योंकि यह बहुत आसान है। ऐसे कई उदाहरण कोरोना काल में सामने आए हैं, जिसमें कोरोना से संक्रमित लोग अनुलोम विलोम प्राणायाम के माध्यम से जल्दी रिकवर हो गए। 


आइए जानते हैं अनुलोम-विलोम करने के उचित तरीके के बारे में।


  •  गुब्बारों को फुलाएं - इस क्रिया के दौरान शरीर से ज्यादा हवा का निष्कासन होता है, जिसके फलस्वरूप अधिक मात्रा में ऑक्सीजन ग्रहण की जाती है। अतः यह एक्सरसाइज फेफड़ों को मजबूत बनाती है।


  • श्वास रोक कर - श्वास रोक कर भी फेफड़ों की कार्य क्षमता बढ़ाई जा सकती है। इसके लिए 20 सेकंड से 60 सेकंड तक अपनी श्वास को रोकें। यह तीन बार करें और डॉक्टर की देखरेख में करें।


  • पानी पीने से - हमारे शरीर की कई बीमारियां सिर्फ पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से ठीक हो जाती है। कोरोना वायरस से बचाव के लिए भी विषेशज्ञों ने पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की सलाह दी है। पानी में ऑक्सीजन भी मौजूद होती है जो हमारे रक्त के ऑक्सीजन स्तर को बनाए रखती है।


उपयुक्त तरीकों को अपनाकर ऑक्सीजन स्तर बढ़ाया जा सकता है। अगर कोई व्यक्ति पहले से ही इन घरेलू उपायों को अपना लें तो उसे कोरोना का खतरा भी कम होगा और अगर वह इस बीमारी से ग्रस्त भी हो जाएं तो उसे रिकवरी में मदद मिलेगी।


कोरोना की दूसरी लहर में ऐसे बरतें सावधानी

कोरोना की दूसरी लहर में अपनाए ये छोटे उपाय

कोरोना के बढ़ते मामलों ने एक बार फिर से लोगों के मन में भय की स्थिति पैदा कर दीं है। लेकिन अब तो कोरोना से सब परिचित हो चुके हैं और सभी इसके बारे में अच्छे से जानने लग गए हैं तो अब मन में भय क्यों?

वैसे देखा जाएँ तो सबके अंदर डर होना वाजिब भी है क्योँकि दूसरी लहर मे सामने आ रहें कोरोना के मामलों की संख्या पिछली बार की तुलना से ज्यादा तेज़ी से बढ़ रही है। कोरोना की पहली लहर में प्रतिदिन आ रहें कोरोना मामलों को 8,105 सें 97,894 तक पहुँचने में 110 दिन का समय लगा था लेकिन दूसरी लहर में ये मामले 62 दिन के अंदर 8,635 से 1,03,885 तक पहुँच गए। इसलिए लोग इस बार अधिक भयभीत हों रहें हैं। इस बार कोरोना क़े फैलने की और संक्रमण की रफ्तार भी पिछ्ली लहर से कई गुणा तेज है।

वर्तमान की भयावह स्थिति को देख कर सबके मन में कई तरह के सवाल उठ रहें हैं कि कोरोना की दूसरी लहर में कैसे सावधानी बरतें? कोरोना की दूसरी लहर में कैसे बचा जा सकता है? कोरोना वैक्सीन कितनी असरदार है? दूसरी लहर में कोरोना के लक्षण क्या है? यह दूसरी लहर इतनी तेज क्यों है? आइए दोस्तों आज के इस लेख से हम सभी सवालों के जवाब देते हुए बताएंगे कि कैसे सावधानी बरतीं जाएँ।

1.       कोरोना की दूसरी लहर इतनी तेज क्यों है?

उतर - अन्य देशों के उदाहरण देखने पर यह ज्ञात होता है कि कोरोना वायरस अपनी दूसरी लहर में तेज़ी से फैलता है। इसके पीछे का कारण यह है कि लोग पहली लहर के बाद असावधानिया बरतने लग जाते है तो वायरस के लिए स्थितियाँ और अनुकूल हो जाती है। सिर्फ कोरोना ही नही बल्कि कोई भी महामारी हो, वह अपने दूसरे चरण में और तेजी से फैलती है।

2.       कोरोना वैक्सीन कितनी असरदार है?

उतर - कोरोना वैक्सीन को लेकर लोगों में सबसे बड़ी गलतफहमी यह रही कि यह कोरोना का इलाज है। लोग वैक्सीन लगवाकर पार्टियाँ कर रहें हैं और ज्यादा असावधानिया बरत रहें हैं। लोगों की इन्हीं गलतीयों के कारण कोरोना की रफ्तार दुगुनी हुई है। कोरोना की वैक्सीन सिर्फ आपके इम्युनिटी सिस्टम को स्ट्रॉन्ग बना सकती है जिससे आप पर कोरोना के संक्रमण का खतरा कम हो जाएँ। अगर वैक्सीन के बाद कोई कोरोना सें संक्रमित होता है तो उस पर कोरोना के लक्षण गम्भीर नही होंगे।

3.       दूसरी लहर में कोरोना के लक्षण क्या है?

अब तक के ज्ञात लक्षण

सामने आ रहें नए लक्षण

बुखार

पेटदर्द

थकान

उल्टी-दस्त

सर्दी-जुकाम

भूख में कमी

स्वाद-गंध न आना

जोड़ों का दर्द

 

कंजक्टिवाइटिस

 

गैस्ट्रोइन्तेस्टाइनल

 

4.      कोरोना की दूसरी लहर में कैसे सावधानी बरतें?

  1. घर से बाहर निकलते वक्त मास्क हमेशा पहनें और बार-बार मास्क को हटाएँ नही।
  2. बाहर के कार्य के दौरान अपने हाथों को छाती से उपर ना लाए, यदि जरुरी कार्य हो तो पहले हाथों को                सेनीटाइज करके करें।
  3. कोरोना के माहौल में खाने-पीने की वस्तुएँ बाहर दोस्तों या सहकर्मियों के साथ शेयर ना करें।
  4. हो सकें तो भीड़ वाले इलाकों में जाने से बचें अन्यथा घर आने के तुरंत बाद नहाएँ और अपने कपड़े - मास्क        धोएँ।
  5. इम्युनिटी को मजबूत करने के लिए व्यायाम और योगा करें और इसके साथ औसधियों का भी उपयोग करें।

कोरोना भले ही गंभीर बीमारी हों लेकिन उपरोक्त छोटे - छोटे उपायों से इससे बचा जा सकता है और अगर इन्ही छोटे तरीकों को नज़र अंदाज़ किया तो परिणाम घातक साबित होंगे।

10 आसान तरीकों से करें अपने मेटाबॉलिज्म को बूस्ट।

शरीर में होने वाली सभी रासायनिक प्रतिक्रियाएं का वर्णन करता हैं, चयापचय। ये सभी क्रियाएं इन्सान के लिए बेहद जरूरी होती हैं। अपने शरीर में चयापचय दर, अपने द्वारा एक दिन में बर्न की गई कैलोरी की मात्रा को दर्शाती हैं। यानि जितनी चयापचय क्रिया जल्दी होगी, उतनी कैलोरी बर्न होगी। इस बात से तो सभी वाकिफ हैं कि शरीर की चर्बी कम करने के लिए कैलोरी बर्न करना बहुत जरूरी होता हैं। इसलिए हमारा मेटाबोलिज्म जितना अच्छी गति से काम करेगा, उतना हमें मोटापे का खतरा कम होगा। (ये 10 आदतें बन रही हैं, आपके बढ़ते मोटापे का कारण)

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चयापचय के उच्च होने से शरीर में अधिक ऊर्जा का निर्माण होता हैं, जो आपकी दिनचर्या के लिए बेहतर हैं। आज Lifes Fact के इस लेख में हम जानेंगे उन आसान 10 तरीकों के बारे में, जो मदद करेंगे हमारे मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करने में।


  1. भरपूर मात्रा में प्रोटीन का सेवन करें - जब आप अधिक प्रोटीन का सेवन करेंगे तो यह आपको ना सिर्फ अधिक खाने से रोकेगा, उसके साथ यह आपके चयापचय को भी बूस्ट करेगा। क्योंकि यह मासपेशियों के नुकसान को कम करता हैं।

  2. ठंडा पानी पिएं - हमेशा कोल्ड ड्रिंक्स की बजाय ठंडा पानी पिए क्योंकि इन शर्करा युक्त पेय पदार्थो में कैलोरी होती हैं। इसलिए जो लोग सिर्फ ठंडा पानी पीते हैं, उन्हे वजन कम करने में आसानी होती हैं। जब आप ठंडा पानी पीते हैं तब आपका शरीर तापमान को नियंत्रित करने के लिए गर्मी उत्पन्न करता है, जिसमें ऊर्जा का उपयोग होता है।

  3. तीव्रता वाले व्यायाम अंतराल में करें‌ - यह आपको फैट बर्न करने के लिए मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करने में मदद करता हैं। इसमें से व्यायाम करें जिसको फुर्ती से किया जाए, इन्हे सेट्स बना कर करें।

  4. अधिक भार उठाने वाले व्यायाम करें - वसा की तुलना में मांसपेशियों में मेटाबॉलिज्म अधिक होता हैं। मांसपेशियों के निर्माण में चयापचय और अधिक तेजी से होता हैं। इसलिए अधिक भार उठाने वाले व्यायाम मांसपेशियों के निर्माण के साथ मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करने में मदद करते हैं।

  5. दिन में बैठने से अधिक खड़े रहे - लंबे समय तक बैठने से आप में कैलोरी बर्न बहुत कम होती हैं। इसकी बजाय अगर आप कुछ काम खड़े रहकर करेंगे तो उसमें ज्यादा कैलोरी बर्न होंगी।

  6. ग्रीन टी पियें - ग्रीन टी चयापचय को बूस्ट करने में मदद करती हैं। यह आपके चयापचय को 5% तक बढ़ा सकती हैं। यह शरीर में जमा फैट को फैटी एसिड में तब्दील कर देती हैं। जिससे फैट बर्न 16 - 17% तक बढ़ जाता है, इसीलिए तो वजन घटाने के लिए ग्रीन टी का इस्तेमाल किया जाता हैं।

  7. मसालेदार और तीखा भोजन खाएं - कैप्साइसिन से भरपूर मिर्च आपके मेटाबॉलिज्म को बढ़ाती हैं। लेकिन यह तरीका स्पाइसी फूड पसंद करने वालों के लिए हैं। पाइल्स रोग से पीड़ित रोगी यह तरीका ना अपनाएं।

  8. रात की नींद अच्छे से लें - नींद की कमी रक्त में शर्करा के स्तर को बढ़ा देती हैं जो मधुमेह का कारण बनती हैं। रात में नींद की कमी आपकी भूख को बढ़ाती हैं, और यह मोटापे का भी कारण कर बनती हैं।

  9. कॉफ़ी पिएं - कॉफी में उपस्थित कैफिन मेटाबॉलिज्म को 10% तक बढ़ा सकती हैं। यह भी फैट बर्न करने में मदद करती हैं। यह आपको वजन कम करने में सहायता करती हैं। यानी चयापचय को बढ़ाने के लिए कॉफी भी एक अच्छा विकल्प हैं।

  10. नारियल तेल का खाने में उपयोग करें - अन्य तेल के मुकाबले नारियल तेल कुकिंग के लिए बेहतर रहता है क्योंकि इसमें उपस्थित फैट अन्य तेल, बटर और घी के फैट के‌ मुकाबले चयापचय में वृद्धि करता हैं।


(आपकी दिनचर्या चयापचय की दर को कम कर सकती हैं।)

अपने जीवन शैली में उपरोक्त छोटे बदलाव करके और इनको अपनाकर आप मेटाबॉलिज्म को बूस्ट कर सकते हैं।‌ यह आपको वजन कम करने के साथ ऊर्जा प्रदान करने में उपयोगी रहेगा।