जानें अनुलोम - विलोम (नाड़ी शोधन) के बारे में।

अनुलोम विलोम प्राणायाम के मुख्य प्रकारों में से एक हैं। जिसे आमतौर पर या दूसरी भाषा में नाड़ी शोधन भी कहा जाता हैं। इस प्राणायाम का नाम दो शब्दों से मिलकर बना हैं जिसमें अनुलोम का अर्थ "सीधा" विलोम का अर्थ "उल्टा" होता हैं। यह प्राणायाम नाड़ियों को शुद्ध करके हमारे शरीर में ऑक्सीजन के स्तर को बढ़ाता है। जिससे थकान, आलस, सुस्ती दूर होकर शरीर चुस्त और ऊर्जावान रहता हैं। इस प्राणायाम का निरंतर अभ्यास शरीर की सभी बंद नाड़ियों को खोलने और मन को शांत बनाए रखने में मदद करता हैं। उपरोक्त सभी फायदों के लिए आज हम जानेंगे नाड़ी शोधन प्राणायाम करने का सही तरीका और इसे करते समय रखना हैं किन बातों का ध्यान।

 

Lifes Fact - जानिए अनुलोम विलोम प्राणायाम - करने का सही तरीका और उचित समय, लाभ, सावधानियां सब कुछ।

अनुलोम विलोम करने का सही तरीका और उचित समय -

  1. इस आसन को करने के लिए सबसे उचित समय वह माना जाता हैं जब आप खाली पेट हो।

  2. अब जमीन पर पद्मासन, सिद्धासन या वज्रासन में से किसी भी आसन की स्थिति में बैठ जाए। इसमें पद्मासन सबसे उत्तम है।

  3. अब बाएं हाथ को घुटने पर टिका कर इस हाथ से चिन मुद्रा बना लें।

  4. दाहिने हाथ के अंगूठे से दाहिने नथुने को बंद करें और बाएं नथुने से धीरे - धीरे सांस लें।

  5. अब हाथ ही रिंग फिंगर से बाएं नथुने को बंद कर ले और दाहिने नथुने से धीरे-धीरे सांस छोड़ें।

  6. अब दाहिने नथुने से सांस लेकर उसे बाएं नथुने से धीरे-धीरे छोड़ें।

  7. इसी तरह अनुलोम - विलोम प्राणायाम का यह एक क्रम पूरा हुआ।

अनुलोम-विलोम प्राणायाम में रखें इन बातों का ध्यान और बरतें निम्न सावधानियां -

  1. इस प्राणायाम के दौरान सांस को 5 सेकंड से अधिक ना रोकें।

  2. अनुलोम विलोम प्राणायाम हमेशा खाली पेट करें। जिसमें सुबह या सूर्यास्त का समय उचित हैं।

  3. दोपहर के भोजन के या किसी भी भोजन के 3 घंटे के बाद ही यह प्राणायाम करें।

  4. अस्थमा और दिल के रोगियों को इस प्राणायाम में एक प्रशिक्षक की मदद जरूर लेनी चाहिए।

अनुलोम विलोम से होने वाले लाभ और फायदे -

  1. यह प्राणायाम फेफड़ों को मजबूत करता है और इससे श्वसन तंत्र सुधरता हैं।

  2. यह प्राणायाम नाडिया‌ं शुद्ध करता हैं, इसलिए इसे नाड़ी शोधन प्राणायाम कहते हैं।

  3. यह शारीरिक और मानसिक तनाव को कम करता है और इससे दिल की गंभीर समस्याओं के लिए बेहतरीन प्राणायाम माना जाता हैं।

  4. इसका निरंतर अभ्यास रक्त परिसंचरण में सुधार लाता हैं और चेहरे की चमक की बढ़ाता हैं।

  5. प्रतिदिन अनुलोम विलोम करने से खर्राटे की समस्या से भी राहत मिलती हैं।

  6. यह प्राणायाम विद्यार्थियों के साथ बड़ों को भी एकाग्र रहने में मदद करता हैं।

  7. शरीर के तापमान को सही बनाए रखने के साथ यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी सुधारता हैं।


Note - अनुलोम - विलोम (नाड़ी शोधन) प्राणायाम को उपरोक्त तरीके से ही किया जाता है और इन्हीं बातों का विशेष रुप से ध्यान रखा जाता हैं। निरंतर रूप से इस प्राणायाम को करने से व्यक्ति को उपरोक्त फायदे होते हैं ।

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