कपाल भाती (Kapalbhati) क्या हैं? जानें इसके फायदें व लाभ।

कपाल भाती जिसे हठयोग भी कहते हैं। यह मस्तिष्क को स्वच्छ और तेज करने वाला एक तरह का प्राणायाम हैं। जिसका अर्थ उसके नाम में ही छिपा हैं। यह संस्कृत के दो शब्दों के योग से बना हैं, जिसमें कपाल का अर्थ माथा या ललाट होता हैं और भाती का अर्थ तेज। यह प्राणायाम मस्तिष्क, लीवर, किडनी के अलावा मानव शरीर के कईं अंगो और क्रियाओं के लिए फायदेमंद हैं।

आज हम Lifes Fact के इस तथ्य से जानेंगे कि क्या हैं कपाल भाती करने का सही तरीका, समय? रखना हैं किन सावधानियों और बातों का मुख्य रूप से ध्यान? क्या हैं इसके लाभ और फायदे?

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कपाल भाती करने का सही तरीका और उचित समय -
  1. इस प्राणायाम के लिए सुबह का समय उचित माना जाता हैं।
  2. सबसे पहले रीढ की हड्डी को सीधे रखते हुवे ध्यान की मुद्रा में बैठ जाएं।
  3. फिर दोनों आंखो को बंद करने के साथ शरीर को ढीला छोड़ दें।
  4. अब नाक के दोनो छिद्रों से एक साथ आराम से व बिना जोर लगाए सांस लें
  5. और पेट की मांसपेशियों को सिकोड़ते हुवे एक साथ सांस को वापिस छोड़ें।
  6. इस क्रिया को वापिस दोहरा कर शुरूआत में 5 से 10 बार करके एक चक्र पूरा करें।
  7. जिसे शुरू में अधिकतम 5 बार दोहराएं।
  8. आसान के बाद आराम की स्थिति में आएं और अपने अंदर की शान्ति को महसूस करें।

इस प्राणायाम में रखें इन बातों का मुख्य रूप से ध्यान और बरतें निम्न सावधानियां -
  1. यह प्राणायाम हमेशा स्वच्छ और ठंडे वातावरण में करें।
  2. ध्यान रहें की वातावरण बंद, गर्म और दुर्गन्ध युक्त ना हों।
  3. महिलाओं को यह प्राणायाम मासिक धर्म और गर्भावस्था के दौरान ना करने की सलाह दी जाती हैं।
  4. शरीर की अधिक कमजोरी और बुखार के दौरान इस प्राणायाम को ना करें।
  5. यह प्राणायाम ज्यादा जोर लगा कर ना करें क्योंकि यह आपके पेट दर्द का कारण बन सकता हैं।
  6. दर्द होने और चक्कर आने की स्थिति में यह प्राणायाम बंद कर दें और शांत हो कर बैठ जाएं।
  7. हाई ब्लड प्रेशर, ह्रदय रोग से पीड़ित रोगियों को यह प्राणायाम धीरे और अपने योग शिक्षक की देख में करे
  8. इसे सुबह खाली पेट करे और खाना खाने के चार घंटे बाद तक यह प्राणायाम नहीं करना चाहिए।
  9. दिन में अधिक बार यह प्राणायाम करने से बचें।
  10. झुक कर और सही स्थिति में नहीं बैठने से यह प्राणायाम आपकी पीठ दर्द का कारण बन सकता हैं।


 कपाल भाती से होने वाले लाभ और फायदें -
  1. मस्तिष्क के साथ यह शरीर के श्वसन तंत्र और पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद हैं।
  2. यह प्राणायाम अस्थमा रोग (दमा) को जड़ से मिटाने में मदद करता हैं।
  3. यह शरीर की अनावश्यक चर्बी को कम करके मोटापे से छुटकारा दिलाने में मदद करता हैं।
  4. यौन सम्बन्धित कई विकारों को ठीक करने में मदद मिलती हैं।
  5. इस प्राणायाम से शरीर की सभी नाडियों को शुद्ध होती हैं।
  6. मन की शान्ति के साथ, रात में नींद अच्छी आती हैं।
  7. रक्त का प्रवाह सुचारु रुप से करता हैं। जिससे चेहरे पर चमक आती हैं।
उपरोक्त सभी तरह का लाभ लेने के लिए कपाल भाती (हठयोग) प्राणायाम को सही तरीके से और नियमित रूप से करना आवश्यक हैं।

इस प्राणायाम के क्रम और चक्र को अपनी शक्ति के अनुसार ही बढ़ाए।

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