प्याज के छिलके हैं ऐसे कईं आयुर्वेदिक गुणों से भरपूर।

कुरकुरी परतों में लिपटा प्याज सिर्फ अंदर से ही नहीं बाहर से भी फायदेमंद हैं। हम आज बात कर रहे हैं प्याज के छिलकों की। काफी लोग हैं जो प्याज खाने के बाद या उनको उपयोग में लेने के बाद छिलकों को कचरे में फेक देते हैं। खास कर शहरों में यह ज्यादा होता आ रहा हैं। क्योंकि हम में से कई लोग नहीं जानते हैं कि ये प्याज के छिलके कईं आयुर्वेदिक गुणों से भरपूर हैंआज आपको हैरानी होने वाली है प्याज के छिलकों के इन फायदों को जान कर -

Life’s Fact - कईं फायदों से भरपूर प्याज के छिलके, एंटीऑक्सीडेंट के स्रोत के रूप में, गले की खराश को कम करने में, बालों की वृद्धि के लिए, त्वचा संबंधित रोगों में, पैरों के दर्द से राहत पाने में, रसोई घर में, आयुर्वेदिक गुणों से

Lifes Fact के इस लेख से आज हम जानेंगे प्याज के छिलको के ढेरों फायदों के बारे में। जिन्हें जान कर आपकी दिनचर्या में काफी बदलाव आ जाएगा।


प्याज के छिलकों के फायदे -


  1. एंटीऑक्सीडेंट के स्रोत के रूप में - इन छिलकों में अधिक एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। जो अपने शरीर के प्रतिरक्षा को बढ़ाता है। खासकर मुक्त कणों की वृद्धि को बाधित करके।


  1. गले की खराश को कम करने में - गले की खराश कई वजह से हो सकती हैं। सर्दियों के मौसम में यह समस्या अधिक बढ़ जाती हैं। खराश से छुटकारा पाने के लिए प्याज के छिलकों को 10 मिनट तक पानी में उबाल लें। फिर इस पानी से गरारे करें। इससे काफी राहत मिलती हैं।


  1. बालों की वृद्धि के लिए - बहुत ज्यादा मात्रा में डैंड्रफ बालो की वृद्धि रोक देता हैं और उन्हें बेजान बना देता हैं। ऐसे में रूखे सूखे बालों के उपचार के लिए प्याज के छिलकों का उबला पानी रोजाना शैम्पू के बाद इस्तेमाल करें। इससे बाल मुलायम हो जाएंगे। नियमित उपयोग से आपको डैंड्रफ से भी छुटकारा मिल जाएगा।


  1. त्वचा संबंधित रोगों में - इन छिलकों में त्वचा को पुनः निर्मित और उसे ठीक करने का गुण होता हैं। चकते, खुजली और त्वचा की सूजन के उपचार में बेहद कारगर हैं। ये छिलके तुरन्त राहत पाने के लिए भी उपयोगी हैं। इसके लिए संक्रमित क्षेत्र पर प्याज के छिलके को रगड़े।


  1. पैरों के दर्द से राहत पाने में - प्याज के छिलकों को 20 मिनट तक पानी में उबाल कर छान लें और इस छने हुए पानी की चाय बना कर रात को सोने से पहले पी लें। हफ्ते भर के नियमित उपयोग से यह आपको पैरों से जुडे़ दर्द से राहत पाने ने मदद करता हैं।


  1. रसोई घर में - यहां पर यह कई तरह से काम में आता हैं - शूप बनाने में, चावल पकाते समय इन छिलकों का उपयोग ले सकते हैं, ब्रेड के पीसे हुवे आते में, सब्जी की ग्रेवी को यह और भी शानदार बनाता हैं।

प्याज का छिलका उपरोक्त फायदों के साथ हमारे दैनिक जीवन को स्वस्थ बनाता हैं। छिलकों के ये फायदे हमे काफी हद तक चिकित्सीय उपचार से छुटकारा दिला सकते हैं। और भी कई चिकित्सीय स्थिति में ये छिलके फायदेमंद रहते हैं -

  • प्याज के छिलकों के साथ उबले पानी की चाय शरीर के अनावश्यक चर्बी को कम करती हैं।

  • यह चाय संक्रमण, एलर्जी और उच्च रक्तचाप के मामलों में भी फायदेमंद रहती हैं।

  • मांसपेशियों में आने वाली ऐठन से छुटकारा दिलाने में ये छिलके उपयोगी हैं।

  • एंटी फंगल गुणों से भरपूर से छिलके त्वचा को खुजली से राहत दिलाते हैं।

  • दांत दर्द जैसी असहनीय पीड़ा में भी प्याज के छिलकों की चाय राहत प्रदान करती हैं।

  • उल्टी, पेट में ऐंठन, मतली, आंतो में कीड़े और बाहरी परजीवियों के संक्रमण जैसी स्थिति में प्याज के छिलकों की चाय असरदार रहती हैं।


सारांश - जैसा कि मैंने पहले ही कहा था कि काफी लोग यह जानकर हैरान हों जाएंगे प्याज के छिलके हैं ऐसे कईं फायदों से भरपूर। याद रहें की ये प्याज के छिलकों से होने वाले फायदे सही तरह और नियमित उपयोग से ही प्राप्त हो पाएंगे। किसी भी तरह की जानकारी के लिए आप हमें कॉमेंट्स करके बता सकते हैं।


Lifes Fact - नाभि से खून क्यों निकलता हैं, माहवारी के समय।

नाभि से खून निकलना की समस्या से कोई भी चिंतित हो सकता हैं। ऐसे में अगर यह माहवारी के दौरान हो तो मन अस्थिर होना लाजमी हैं। इस समस्या से आज लडकियों के अलावा लड़के भी ग्रसित हैं। इसलिए यह जानना बेहद जरूरी हो जाता हैं कि किस वजह से आपकी नाभि से खून निकल रहा हैं। आज हम Lifes Fact के इस लेख से बताएंगे कि नाभि से खून निकलने के क्या कारण हो सकते हैं, इनके क्या लक्षण हैं और क्या उपचार हैं।

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आपकी नाभि से खून निकलने के मुख्य 3 कारण हो सकते हैं। जिसमें संक्रमण, पोर्टल उच्च रक्तचाप और प्राथमिक गर्भनाल एंडोमेट्रियोसिस में से एक जटिलता हो सकती हैं। चलियें विस्तार से समझते हैं नाभि से खून निकलने वाले इन कारणों के बारें में -


1. नाभि में होने वाला संक्रमण

नाभि में संक्रमण होना एक आम बात हैं। क्योंकि शरीर का यह भाग नमीयुक्त होने के साथ गहरा भी होता हैं। बाकी शरीर के तापमान की तुलना में यह गर्म भी होता हैं। इस तरह की परिस्थिति परजीवियों के विकास को बढ़ावा देती हैं। इसलिए यहां संक्रमण होना आसान हो जाता हैं। इसके अलावा अगर आपने अपनी नाभि के पास छेदन करा रखा हैं तो इससे संक्रमण की संभावना और बढ़ जाती हैं।


1.1 नाभि में होने वाले संक्रमण के लक्षण

अलग-अलग प्रकार से संक्रमण होने के कारण इसके लक्षण भी अलग अलग हो सकते हैं। आइए जानते हैं कुछ सामान्य संकेत और लक्षण के बारे में -

  1. कोमलता

  2. दर्द

  3. नाभि के आसपास की त्वचा का रंग बदलना

  4. त्वचा का लाल होना

  5. खुजली, जलन का एहसास

  6. मवाद से भरा फोड़ा (छाला)

  7. नाभि के आसपास सूजन आना

  8. नाभि से बदबूदार सफेद पीले हरे या भूरे रंग का तरल निकलना

  9. जी मचलना, उल्टी आना

  10. सिर चकराना

  11. खून बहना


1.2 नाभि के संक्रमण के दौरान रखी जाने वाली सावधानियां और उपचार

  1. ऐसे में ढीले कपड़े पहनना अच्छा रहता हैं।

  2. अपने शरीर को पूर्ण रूप से स्वच्छ बनाए रखें।

  3. गरम पानी और स्वच्छ कपड़े के साथ नाभि की सफाई करें।

  4. नाभि के आसपास पहने हुए गहनों को हटवाएं।


जीवन शैली में बदलाव के अलावा इसके उपचार के लिए अच्छे डॉक्टर से परामर्श लेना उचित रहेगा।


2. पोर्टल उच्च रक्तचाप

हेपेटाइटिस सी और सिरोसिस इसका मुख्य रूप से कारण बन सकते हैं।


2.1 पोर्टल उच्च रक्तचाप के लक्षण

  1. पेट में सूजन आना।

  2. काले रंग का मल निकलना।

  3. काले रंग की उल्टी निकलना।

  4. पेट दर्द के साथ बेचैनी


2.3 पोर्टल उच्च रक्तचाप के लिए टेस्ट और उपचार

ऐसी परिस्थिति में डॉक्टर से अपने सीटी स्कैन, एम आर आई, अल्ट्रासाउंड जैसे टेस्टों की रिपोर्ट जरूर चेक करवाएं। इसके अलावा खून की जांच भी जिससे प्लेटलेट और वाइट ब्लड सेल की संख्या का पता कर सकें।


इसके उपचार के तौर में आपको चिकित्सक से रक्तचाप को कम करने की दवाएं शीघ्र ले लेनी चाहिए। गंभीर मामलों में लिवर ट्रांसप्लांट की स्थिति भी आ सकती हैं।


3. प्राथमिक गर्भनाल एंडोमेट्रियोसिस

यह सिर्फ महिलाओं को प्रभावित करता हैं। एंडोमेट्रियोसिस की वजह से महावारी के दौरान नाभि से खून आता हैं। क्योंकि इस स्थिति में जो उत्तक गर्भाशय के अस्तर को बनाता हैं, वह नाभि में दिखाई देने लग जाता हैं।


3.1 प्राथमिक गर्भनाल एंडोमेट्रियोसिस के लक्षण

  1. नाभि से खून बहना।

  2. पेट के चारों ओर से दर्द होना।

  3. नाभि में सूजन आना।

  4. नाभि के आस पास गांठ होना।


3.2 प्राथमिक गर्भनाल एंडोमेट्रियोसिस टेस्ट और उपचार

इसमें सबसे पहले सीटी स्कैन, एम आर आई, अल्ट्रासाउंड जैसे टेस्टों के द्वारा चिकित्सक से गर्भनाल एंडोमेट्रियोसिस होने या ना होने का पता लगाएं।


इसके उपचार के लिए हार्मोन थेरेपी या सर्जरी का सहारा लेना पड़ता है।


सारांश

नाभि से खून या फिर बदबूदार तरल पदार्थ निकलने की स्थिति में सबसे पहले अपनी दिनचर्या में सुधार करें और अपना व्यक्तिगत रखरखाव स्वच्छ रखें। ऐसी स्थिति को शुरुआती दौर में अनदेखा ना करें और जल्द ही अपने डॉक्टर से सलाह लें।


Life's Fact - क्या हैं पुश अप? जानें इससे जुड़ें मिथ और फैक्ट्स।

Lifes Fact - पुश अप से जुड़ें मिथ और फैक्ट्स, क्या हैं पुश अप

एक्सरसाइज की सूची में पुश अप का नाम तो सबसे पहले आता हैं। इसलिए हर कोई इससे भली भांति परिचित हैं। जो लोग अभी तक इसके बारे में नहीं जानते तो उन्हें मैं बताना चाहूंगा कि यह एक ऐसी एक्सरसाइज हैं, जिसमें शरीर को प्रवण (prone) स्थिति में लाकर पंजों और हथेलियों द्वारा शरीर को ऊपर पुश किया जाता हैं।

सामान्य पुश अप को शरीर के ऊपरी भाग की ताकत बढ़ाने के लिए किया जाता हैं। इस एक्सरसाइज के दौरान ट्राइसेप्स, छाती की मांसपेशियों और कंधों पर ज्यादा कसाव आता हैं। जिससे शरीर के ये अंग ज्यादा मजबूत होते हैं।

पुशअप्स को नियमित और उचित रुप से करने पर पेट की मांसपेशियों में खिंचाव आता हैं और शरीर का यह भाग भी मजबूत बनता हैं।

 

आज हम Lifes Fact की इस पोस्ट के माध्यम से जानेंगे पुशअप्स से जुड़े मिथ और फैक्ट्स के बारे में -

1. क्या पुश अप से पूरी बॉडी बन सकती हैं?

यह वर्कआउट मुख्य रूप से ट्राइसेप्स, कंधो और छाती के लिए हैं। इसके द्वारा हम शरीर के इन अंगो को मजबूत और सॉलिड बना सकते हैं। नियमित रूप से करने पर यह इन अंगो के अलावा पेट के लिए फायेदमंद हो सकता हैं। लेकिन पूरी बॉडी के लिए आपको इसके अलावा अन्य एक्सरसाइज करनी पड़ेंगी।

2. क्या बच्चे पुश अप कर सकते हैं?

यह एक्सरसाइज सभी के लिए फायदेमंद होती हैं। बस इसे अपनी क्षमता के अनुसार करें। इसका सामान्य प्रकार तो सभी उम्र के लड़के - लडकियों के लिए हैं।

3. क्या मधुमेह रोगी इस कसरत को कर सकता हैं?

जी बिलकुल, वसा की तुलना में glucose का अत्यधिक उपयोग मांसपेशियों में होता हैं। इसलिए मधुमेह रोग के दौरान ऐसा वर्कआउट रोगी के लिए फायदेमंद रहता हैं।

4. हमें 1 दिन में कितने पुशअप्स लगाने चाहिएं? क्या एक दिन में 100, 200 या 500 पुश अप सही हैं?

यह मुख्य रूप से आपकी शरीर की क्षमता और आपके बाकी दिन की एक्सरसाइज पर निर्भर करता हैं। 18 से 30 वर्ष के आदमी को 30 और महिलाओं को 18-20 पुश अप के साथ शुरुआत करनी चाहिए। जिसे बाद में आप अपनी क्षमता के अनुसार बढ़ा सकते हैं। इसे आसान बनाने के लिए इसे 12-10-8 के सेट में भी कर सकते हैं।

5. क्या रोजाना पुश अप करना खतरनाक होता हैं?

एक सामान्य इंसान के लिए रोजाना पुश अप करना खतरनाक नहीं बल्कि फायदेमंद होता हैं। इससे छाती और ट्राइसेप्स की साइज भी बढ़ती हैं। इस एक्सरसाइज को सुबह - शाम भी कर सकते हैं। रोजाना इसे करने से शरीर में तोंद भी नहीं बढ़ती और सिक्स पैक बनाना भी आसान हो जाता हैं। यह शरीर में खून के प्रवाह को भी बढ़ाता हैं। जिससे चेहरे पर चमक आती हैं। इसके अन्य प्रकार बालों की ग्रोथ के लिए अच्छे हैं।

6. पुश अप के दौरान सांस लेने का सही तरीका?

इसके दौरान शरीर को नीचे लाते वक्त सांस लेना और ऊपर उठाते वक्त सांस छोड़ना इस एक्सरसाइज में सांस लेने का सही तरीका होता हैं।

7. पुश अप के दौरान दर्द।

शुरुआत में कोई भी एक्सरसाइज करने पर उस एक्सरसाइज के दौरान ज्यादा प्रभावित अंग कुछ दिनों के लिए दर्द करते हैं। कभी-कभी सही तरीके से वर्कआउट ना करना शरीर के अन्य अंगों के दर्द का कारण बन जाता हैं। कमर दर्द, पीठ में खिंचाव जैसी स्थिति में यह वर्कआउट करने से पहले अपने टेंडर की राय जरूर लें। 

हर एक्सरसाईज करने का एक तरीका होता हैं, जो गलत होने पर हमेशा हमें फायदे की जगह नुकसान पहुंचाता हैं। इसी तरह वर्कआउट करने का भी सही तरीका आना बहुत जरूरी हैं। कई लोगों की इस एक्सराइज के दौरान दर्द की शिकायत रहती हैं। इसमें मुख्य रूप से छाती में, कंधे में, पीठ की मांसपेशियों में, कोहनी जैसे भाग में ज्यादा दर्द की शिकायत रहती हैं।

पुश अप करने का सही तरीका -

  1. पुश अप के लिए सबसे पहले शरीर को प्रवण (prone) की स्थिति में ले आएं।
  2. जिसमें ध्यान रहें दोनो हाथों की हथेलियों को छाती की सीध में जमीन पर रखें।
  3. पंजो को पास में रखें।
  4. अब सांस लेने के साथ शरीर को नीचे ले जाते वक्त सांस लें।
  5. सांस छोड़ते हुवे शरीर को ऊपर उठाएं।

 

सारांश - शरीर को फिट रखने के लिए और शरीर के ऊपरी भाग को मजबूत बनाने के लिए पुश अप उत्तम व्यायाम हैं। बस इसे करने से पहले इसको करने का तरीका और इससे जुड़े मिथ को पढ़ना हमारे लिए बेहतर रहता हैं।

दाढ़ी (ठोड़ी) पर तिल में छुपी हैं ये बातें, जानें इनके बारे में।

दोस्तों इन्सान के शरीर के किसी ना किसी भाग पर तिल (Moles) ज़रूर होते हैं। जिसके बारे में लोगों को अपने - अपने स्तर के हिसाब से पता होता हैं। इसके बावजूद भी काफी लोगों को तिल के बारे में पता नहीं होता। मैने काफी लोगों को अपने तिल को किसी धातु की चीज या किसी अन्य नुकीली चीजों से भी से खुरचते देखा हैं। अगर आप भी कुछ इस तरह की गलती करते हैं तो हो जाइए सावधान और जानिए मेरे (Lifes Fact) साथ की आखिर तिल क्या होता हैं और क्यों होता? क्या हैं दाढ़ी (ठोड़ी) के तिल का महत्व?

तिल (Moles) त्वचा का ही रूप होता हैं। जिनका निर्माण रंजित कोशिकाओं (Pigmented Cells) के समूहों के कारण होता हैं। ये अक्सर छोटे, गहरे काले - भूरे रंग के धब्बों के रूप में दिखाई देते हैं।

तिल इन्सान की बढ़ती उम्र के साथ दिखाई देते हैं। जो कई बार ढलती उम्र की वजह से फीके भी पड़ जाते हैं।

आम तौर पर देखा जाएं तो तिल से किसी प्रकार का नुकसान नहीं होता लेकिन कुछ तिल त्वचा से संबंधित कैंसर जैसे घातक रोग का कारण बन जाते हैं।

हमें कभी भी अपने तिल को नहीं छेड़ना चाहिए। नुकीली और धातुओं से निर्मित वस्तुओं से कभी भी तिल को हानि नहीं पहुचानी चाहिएं। इसकी वजह से आपको काफी रोग और इंफेक्शन हो सकते हैं। जो आगे चल कर कैंसर जैसे जटिल रोग का कारण भी बन सकता हैं।

दाढ़ी या ठोढ़ी पर तिल, चेहरे पर तिल, तिल के राज, रहस्य, किस्मत, भाग्य

दाढ़ी (ठोड़ी) पर तिल - काफी लोगों का तिल उनकी दाढ़ी पर होता हैं। जिसे ले कर लोगों के मन में कई सवाल खड़े रहते हैं। इसलिए सबसे पहले में उन सभी को बता दूं की दाढ़ी (ठोड़ी) पर तिल का होना बहुत अच्छा माना गया हैं क्योंकि इस तरह के इन्सान को हमेशा परंपरावादी माना गया हैं।

इस तरह के लोग हमेशा परिवार को सुखी रखने का प्रयास करते हैं। ऐसे लोग, अन्य लोगों के साथ मधुर संबंध रखते हैं। क्योंकि ये इन्सान हमेशा से चली आ रही परंपरा और रिश्तों को बनाए रखने में सफल होते हैं।

आम तौर पर शांत स्वभाव से रहने वाले ये व्यक्ति कभी - कभी अत्यधिक क्रोधी भी हो जाते हैं। ये लोग किसी भी कार्य को अपनी पूरी लगन और ईमानदारी के साथ करते हैं।

ठोड़ी पर तिल वाले व्यक्ति अपने काम के द्वारा कई प्रशंसा प्राप्त करने का हुनर रखते हैं। यदि तिल ठोड़ी के दाईं और स्थित है, तो ऐसे व्यक्ति तार्किक विचार वाले और कूटनीतिक स्वभाव रखने वाले होते हैं।

ऐसे लोग अपने जीवन में नाम और प्रसिद्धि प्राप्त करते हैं और ये लोग अधिक कमाते हैं। दूसरे लोगों को समझाने के मामले में भी यह लोग अच्छे होते हैं।

अगर किसी व्यक्ति का तिल ठोड़ी के बाईं ओर स्थित हो तो वह व्यक्ति सीधा होता हैं। जिसे आसानी से पसंद नहीं किया जाता। लेकिन इनका सरल स्वभाव किसी - किसी के लिए आकर्षण का केंद्र बन जाता हैं।

निष्कर्ष के तौर पर देखा जाएं तो दाढ़ी यानि ठोड़ी पर उपस्थित तिल इन्सान के लिए अच्छा ही होता हैं। कई बार ये इन्सान के चेहरे की सुन्दरता भी बढ़ाते हैं। कुछ लोग ठोड़ी के तिल को हटाने का विचार भी रखते हैं तो ऐसे लोगों के लिए सिर्फ यही सलाह हैं की इसके लिए किसी विशेषज्ञ या चिकित्सक से संपर्क ज़रूर करें। अन्य किसी भी तरह की जानकारी के लिए हमे कमेंट करके जरुर बताएं।


कपाल भाती (Kapalbhati) क्या हैं? जानें इसके फायदें व लाभ।

कपाल भाती जिसे हठयोग भी कहते हैं। यह मस्तिष्क को स्वच्छ और तेज करने वाला एक तरह का प्राणायाम हैं। जिसका अर्थ उसके नाम में ही छिपा हैं। यह संस्कृत के दो शब्दों के योग से बना हैं, जिसमें कपाल का अर्थ माथा या ललाट होता हैं और भाती का अर्थ तेज। यह प्राणायाम मस्तिष्क, लीवर, किडनी के अलावा मानव शरीर के कईं अंगो और क्रियाओं के लिए फायदेमंद हैं।

आज हम Lifes Fact के इस तथ्य से जानेंगे कि क्या हैं कपाल भाती करने का सही तरीका, समय? रखना हैं किन सावधानियों और बातों का मुख्य रूप से ध्यान? क्या हैं इसके लाभ और फायदे?

Lifes Fact - कपाल भाती करने का सही तरीका और समय, kapalabhati breathing, kapalbhati technique

कपाल भाती करने का सही तरीका और उचित समय -
  1. इस प्राणायाम के लिए सुबह का समय उचित माना जाता हैं।
  2. सबसे पहले रीढ की हड्डी को सीधे रखते हुवे ध्यान की मुद्रा में बैठ जाएं।
  3. फिर दोनों आंखो को बंद करने के साथ शरीर को ढीला छोड़ दें।
  4. अब नाक के दोनो छिद्रों से एक साथ आराम से व बिना जोर लगाए सांस लें
  5. और पेट की मांसपेशियों को सिकोड़ते हुवे एक साथ सांस को वापिस छोड़ें।
  6. इस क्रिया को वापिस दोहरा कर शुरूआत में 5 से 10 बार करके एक चक्र पूरा करें।
  7. जिसे शुरू में अधिकतम 5 बार दोहराएं।
  8. आसान के बाद आराम की स्थिति में आएं और अपने अंदर की शान्ति को महसूस करें।

इस प्राणायाम में रखें इन बातों का मुख्य रूप से ध्यान और बरतें निम्न सावधानियां -
  1. यह प्राणायाम हमेशा स्वच्छ और ठंडे वातावरण में करें।
  2. ध्यान रहें की वातावरण बंद, गर्म और दुर्गन्ध युक्त ना हों।
  3. महिलाओं को यह प्राणायाम मासिक धर्म और गर्भावस्था के दौरान ना करने की सलाह दी जाती हैं।
  4. शरीर की अधिक कमजोरी और बुखार के दौरान इस प्राणायाम को ना करें।
  5. यह प्राणायाम ज्यादा जोर लगा कर ना करें क्योंकि यह आपके पेट दर्द का कारण बन सकता हैं।
  6. दर्द होने और चक्कर आने की स्थिति में यह प्राणायाम बंद कर दें और शांत हो कर बैठ जाएं।
  7. हाई ब्लड प्रेशर, ह्रदय रोग से पीड़ित रोगियों को यह प्राणायाम धीरे और अपने योग शिक्षक की देख में करे
  8. इसे सुबह खाली पेट करे और खाना खाने के चार घंटे बाद तक यह प्राणायाम नहीं करना चाहिए।
  9. दिन में अधिक बार यह प्राणायाम करने से बचें।
  10. झुक कर और सही स्थिति में नहीं बैठने से यह प्राणायाम आपकी पीठ दर्द का कारण बन सकता हैं।


 कपाल भाती से होने वाले लाभ और फायदें -
  1. मस्तिष्क के साथ यह शरीर के श्वसन तंत्र और पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद हैं।
  2. यह प्राणायाम अस्थमा रोग (दमा) को जड़ से मिटाने में मदद करता हैं।
  3. यह शरीर की अनावश्यक चर्बी को कम करके मोटापे से छुटकारा दिलाने में मदद करता हैं।
  4. यौन सम्बन्धित कई विकारों को ठीक करने में मदद मिलती हैं।
  5. इस प्राणायाम से शरीर की सभी नाडियों को शुद्ध होती हैं।
  6. मन की शान्ति के साथ, रात में नींद अच्छी आती हैं।
  7. रक्त का प्रवाह सुचारु रुप से करता हैं। जिससे चेहरे पर चमक आती हैं।
उपरोक्त सभी तरह का लाभ लेने के लिए कपाल भाती (हठयोग) प्राणायाम को सही तरीके से और नियमित रूप से करना आवश्यक हैं।

इस प्राणायाम के क्रम और चक्र को अपनी शक्ति के अनुसार ही बढ़ाए।

बालों की हर समस्या का हल करें, प्याज के ये 3 पोषक तत्व।

बालों से संबंधित समस्या के लिए प्याज के उपयोग के बारे में तो हर कोई जानता हैं। इसके इस्तेमाल की सलाह भी कोई ना कोई किसी ना किसी को जरूर देता हैं। लेकिन इसके इस्तेमाल से पहले हर किसी के मन में एक सवाल जरूर आता है कि आखिर बालों की हर समस्या के लिए आखिर प्याज ही क्यों? क्या प्याज बालों की समस्या के लिए कारगर उपाय साबित हो सकता हैंLifes Fact के इस लेख से आज हम आपको बताएंगे बालों की हर समस्या के लिए प्याज के पोषक तत्व

Lifes Fact - प्याज के ये 3 पोषक तत्व, बालों की हर समस्या के लिए

प्याज के इन 3 पोषक तत्वों की वजह से ही प्याज के रस का उपयोग बालों को बेहतर बनाने के लिए किया जाता हैं। बालों में लगाए जाने वाले प्याज के रस के ये पोषक तत्व बालों के रोम छिद्रों में पोषण देते हैं जिससे बालों की जड़े मजबूती होती है और बालों में भी चमक बढ़ती हैं। बालों को मिलने वाला अतिरिक्त पोषण इनके टूटने और पतले होने की वजह भी कम कर देता हैं।

जानिए प्याज का रस बनाएं और लगाएं कैसे?

प्याज के ये 3 पोषक तत्व बालों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करते हैं -

1.   आहार सल्फर

2.   एंटी-माइक्रोबियल गुण

3.   एंटीऑक्सीडेंट

1. आहार सल्फर - प्याज का रस बालों के स्वास्थ्य में लाभदायक होने का मुख्य कारण आहार सल्फर होता हैं। यह शरीर में पाए जाने वाले खनिजों में से एक है। यह एंजाइम और प्रोटीन के पर्याप्त उत्पादन के लिए आवश्यक है। केराटिन में सल्फर भी पाया जाता है, जो बालों के घटकों में से एक है।

प्याज के रस में मौजूद आहार सल्फर बालों को पोषण प्रदान करने का अच्छा स्रोत बन जाता हैं।

2. एंटी-माइक्रोबियल गुण - कई बार सिर की त्वचा में भी संक्रमण होता हैं। जो बालों के झड़ने का मुख्य कारण भी बन जाता हैं। इसलिए सिर की त्वचा का रोग रहित होना अच्छे बालों के लिए बहुत जरूरी हैं।

ऐसी परिस्थिति में प्याज के एंटी-बैक्टीरियल गुण सिर की त्वचा में फैले संक्रमण से लड़ने में मदद करते हैं और खोपड़ी को रोग रहित बनाते हैं।

3. एंटीऑक्सीडेंट - मुक्त कण बालों के रोम छिद्रों को नष्ट करते हैं और बालों को पतला बनाते हैं। कुल मिलाकर यह बालों को बहुत नुकसान पहुंचाते हैं।

प्याज के रस में फ्लेवोनॉयड्स जैसे एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। ये एंटीऑक्सिडेंट शरीर को मुक्त कणों से बचाते हैं। जिससे बालों को कम नुकसान पहुंचता हैं।

प्याज के इन 3 पोषक तत्वों की वजह से यह बालों की हर समस्या का हल हो सकता हैं। प्याज के रस का नियमित उपयोग स्वस्थ बालों के साथ सिर की त्वचा को भी स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता हैं। बालों से संबंधित अधिक जानकारी के लिए हमें कॉमेंट करके जरूर बताएं

बालों के लिए प्याज का रस - जानें कैसे बनाएं और कैसे इस्तेमाल करें?

सिरों के बाल हो या फिर दाढ़ी - मूछ दोनों के लिए आज के समय में हर कोई सुझाव देता हैं की आप प्याज का रस लगाये। वर्तमान में देखा जाएं तो बालों की समस्या के मामले भी पहले की तुलना में ज्यादा बढ़ गए हैं। जैसे बालों का झड़ना, सिर में इंफेक्शन होना, तैलीय बाल व खोपड़ी, बालों की ग्रोथ कम होना, रूखे - सूखे बाल, बालों में चमक की कमी आदि कई तरह की कई परेशानियों से हर कोई चिंतित हैं।

Lifes Fact - जानें प्याज का रस कैसे बनाएं, बालों के लिए कैसे इस्तेमाल करें

इन सभी समस्याओं के लिए घरेलू उपचार के रूप में प्याज के रस के बारे में हर किसी ने सुना है। जिसमें से कई लोगों ने तो आजमाया भी होगा, लेकिन बेहतरीन परिणाम के लिए प्याज के रस को बनाने और लगाने का तरीका आना बहुत जरूरी हैं। आज Lifes Fact के इस पोस्ट से हम जानेंगे - प्याज का रस बनाएं और लगाएं कैसे?

 

प्याज का रस बनाने का तरीका -

  1. इस रस को बनाने के लिए हमें सबसे दो से चार मध्यम आकार के प्याज लेंगे।

  2. आप अपनी अवश्यकता के हिसाब से प्याज को संख्या को बढ़ा भी सकते हैं।

  3. अब इन्हें छील का छोटे टुकड़ों में काट लें।

  4. इन टुकड़ों को जूसर या ब्लेंडर की मदद से पिस लें।

  5. साफ सूती कपड़े में इस मिश्रण को डालकर सारा प्याज का रस निकाल लें।

  6. लीजिए आपका प्याज का रस तैयार हैं।

प्याज का रस लगाने का तरीका -

  1. प्याज का रस हमेशा रात को सोते वक्त लगाना चाहिए। इससे परिणाम बेहतर मिलते हैं।

  2. अगर आपके बाल सूखे - रूखे से रहते हैं तो इस प्याज के रस में नारियल का तेल डालकर लगाएं।

  3. सिर्फ प्याज के रस का इस्तेमाल आप प्रतिदिन कर सकते हैं लेकिन नारियल तेल के साथ इसका उपयोग हफ्ते में दो बार ही करें।

  4. बाकी दिनों में सिर्फ प्याज का तेल ही लगाएं।

  5. प्याज का रस फंगल इंफेक्शन को कम करता हैं और इसमें मौजूद सल्फर बाल बढ़ाने में मदद करता हैं। इसलिए इस बालों के साथ दाढ़ी पर भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

  6. प्याज के रस लगे बालों को धोने के लिए आप किसी भी तरह के माइल्ड शैंपू का इस्तेमाल कर सकते हैं।

  7. आप अपने निजी तौर पर प्रयोग में आने वाले शैम्पू का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।

इस तरह से बने प्याज के रस को उपरोक्त तरीके से लगाने से आपको बालों के लिए जबरदस्त फायदा मिलेगा। अधिक जानकारी के लिए कॉमेंट्स में अपनी राय जरूर दें।

 

Note - बेहतर लाभ लेने के लिए हमेशा प्याज का रस ताजा बनाएं।

ऐसे होगा होम्योपैथिक दवा से सभी तरह के दाद रोग का रामबाण इलाज।

फफूंदी जैसा परजीवी इन्सान की बाहरी त्वचा पर संक्रमण कर दाद रोग का कारण बनता है, यह परजीवी इन्सान की बाहरी त्वचा पर पनपता रहता हैं। यह रोग जानवर से इन्सान में सिर्फ छूने से फैल सकता हैं, जो एक इन्सान से दूसरे इन्सान में बड़ी आसानी से फैल सकता हैं। दाद वाली जगह पर खुजली आती रहती हैं, जिससे इसके फैलने का खतरा भी बना रहता हैं। आज Lifes Fact के इस पोस्ट से जानेंगे सभी तरह के दाद रोग का सही उपाय होम्योपैथिक दवा से, जिसे आसानी से घर पर बैठ कर किया जा सकता हैं।

Lifes Fact - दाद रोग का रामबाण इलाज, दाद खाज की दवा होम्योपैथिक

इन 6 होम्योपैथिक दवा से करे सभी तरह के दाद रोग का इलाज -


  1. आर्सेनिक एल्बम - दाद रोग में होम्योपैथिक की यह दवा बेहद कारगर हैं। यह दवा शरीर के सभी अंगों पर कार्य करती हैं। यह त्वचा पर अधिक प्रभावित हिस्से, जिस पर खुजली ज्यादा हों। ऐसी परिस्थिति में यह राहत का कार्य करती हैं और इस समस्या से छुटकारा दिलाती हैं।
  2. दुल्कामारा - यह दवा सिर पर दाद, उनसे निकलने वाले खून की समस्या में छुटकारा दिलाती हैं। यह दवा उमस भरे व नमीयुक्त मौसम में भी त्वचा की रक्षा करती हैं, और फंगल इंफेक्शन से बचाती हैं।
  3. नेट्रम म्यूरीएटिकम - लंबे समय से चल रही और पुरानी से पुरानी दाद के इलाज में इस दवा का उपयोग फायदेमंद होता हैं। कोहनी, घुटनों के अलावा सिर वाली तैलीय त्वचा में होने वाले इंफेक्शन से यह दवा आराम दिलाती हैं।
  4. सोरीनम - ये होम्योपैथिक दवा दाद के साथ सभी तरह की त्वचा संबंधित समस्या को ठीक करने में सक्षम हैं। दाद में होने वाली अत्यधिक खुजली में ये दवा काफी कारगर हैं। शरीर के जोड़ और मोड़ वाले हिस्से जैसे कोहनी, घुटनें वाली त्वचा पर होने वाली दाद और उसके घाव के लिए सोरीनम फायदेमंद हैं।
  5. सीपिया - यह दवा मुख्य रूप से दाद से ग्रसित महिलाओं के लिए हैं। इस दवा से ज्यादा पसीने आने की वजह से होने वाले इंफेक्शन में, बदबूदार पसीने में, अधिक खुजली वाली दाद से आराम पाया जा सकता हैं।
  6. सल्फर - ये दवा उन लोगों के लिए बेहद जरूरी हैं, जिन्हें सिर की रूखी दाद से बाल झड़ने की समस्या भी हो। ये दवा रूखी खुजली वाली त्वचा के लिए उपयुक्त हैं।

Note - इन सभी दवाइयों का सेवन होम्योपैथी डॉक्टर की सलाह ले कर करे, अच्छे परिणाम मिलेंगे।


दोस्तों होम्योपैथिक दवा का सबसे बड़ा फायदा यह हैं कि इससे किसी भी तरह का साइड इफेक्ट नहीं होता हैं। यह इलाज आपकी समस्या के अनुसार चलता हैं। अगर दाद ज्यादा पुरानी हैं तो समय थोड़ा ज्यादा लगेगा।