पोषक तत्वों व फाइबर से भरपूर मटर स्वास्थ्य के लिए हैं पौष्टिक।

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हरे मटर का स्वाद इसे सब्जियों में लोकप्रिय बनाता है लेकिन इसके पोषक तत्व इसे गुणकारी भी बनाते हैं। मटर स्वाद के साथ स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद होते हैं क्योंकि इसमें प्रचुर मात्रा में फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। वर्तमान तक ज्ञात शोधों के अनुसार यह पुरानी बीमारियों से बचने में भी मददगार है। लेकिन अधिक मात्रा में इसका सेवन नुकसान दायक हो सकता है।

कई लोगों का दवा है की मटर स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती है और इसे नहीं खाना चाहिए। आज के लेख से हम मटर में पाएं जाने वाले न्यूट्रिएंट्स व फाइबर के बारे में जानेंगे और यह निर्धारित करेंगे कि किस प्रकार मटर हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहतर है।

हरी मटर में पोषक तत्वों और एंटीऑक्सीडेंट की भरमार होती है। इसमें कैलोरी कम मात्रा में पाई जाती है और प्रोटीन अधिक मात्रा में पाई जाती है। मटर में पर्याप्त मात्रा में फाइबर, आपके लिए आवश्यक सभी विटामिन और खनिज होते हैं। मटर में ये पोषक तत्व पाए जाते हैं - कार्ब्स, फाइबर, प्रोटीन, विटामिन ए, विटामिन K, विटामिन सी, थायमिन, फोलेट, मैंगनीज, आयरन, फास्फोरस।

खाली पेट खाएं ये चीजें, मिलेंगे जबरदस्त फायदे।

हरे मटर खाने के फायदे -

  • मटर में उपलब्ध उच्च प्रोटीन आपकी भूख को कम करती है, जिससे वजन पर नियंत्रण किया जा सकता है।
  • यह मांसपेशियों की मजबूती, हड्डियों को स्ट्रॉन्ग बनाने में सहायक है।
  • कम कैलोरी के कारण यह मोटापे की समस्या से छुटकारा दिलाता है।
  • कम जीआई के कारण हरी मटर रक्त शर्करा नियंत्रण में सहायता करती है।
  • मधुमेह और हृदय रोग जैसे खतरनाक स्थितियों के खतरनाक प्रभाव को कम करने में मटर फायदेमंद साबित हो सकती है।
  • इसमें पाया जाने वाला उच्च फाइबर पाचन को लाभ पहुँचाता है। इसके अलावा यह पेट और पाचन से जुड़ीं कई समस्याओं से छुटकारा दिलाता है।


ध्यान रहें की अधिक मात्रा में मटर का सेवन आपके लिए हानिकारक साबित हो सकता है इसलिए एक निश्चित मात्रा में भी हरे मटर का सेवन करें।


Winter diet for 2021: खाली पेट खाएं ये चीजें, मिलेंगे जबरदस्त फायदे।

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एक Healthy Winter Diet आपके लिए सर्दियों के मौसम की परेशानियों को कम कर सकती है। सर्दियों में अपने खाने-पीने का ध्यान बहुत जरूरी है और कुछ चीजों को सुबह खाली पेट खाने से वे शरीर में दवा की तरह काम करती है। आइए जानते हैं कि ठण्ड में किन चीजों के रोजाना सेवन से बीमारियों से बचा जा सकता है।

Winter Diet Plan for 2021: ठण्ड का मौसम सुहावना होता है इसमें तरह-तरह की चीजें खाने को दिल करता है। वैसे भी गर्मियों की तुलना में सर्दियों में हमारी डाइट भी बढ़ जाती है। इस मौसम में गर्म पकवानो का तो अपना अलग ही मजा है, लेकिन स्वाद के चक्कर में यह गर्म-गर्म चीजें आपके पाचन तंत्र और स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। इस वर्ष 2021 में तो अपने स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही ज्यादा भारी पड़ सकती है। इसलिए अपनी Winter Diet में कुछ Healthy चीजों को शामिल करें ताकि दिन भर एनर्जी रहने के साथ इस मौसम में आपका Immune System मजबूत बना रहें। इसलिए सुबह की शुरुआत इन Winter Foods के साथ करें।

सर्दियों में अपने Vitamin D के स्तर पर दे ध्यान।

गुनगुने पानी में शहद

शरीर के लिए सुबह गुनगुना पानी हर मौसम में अच्छा होता है लेकिन सर्दियों के मौसम में इसे पीने की रूचि भी जाग जाती है। सर्दियों में सुबह गुनगुने पानी में शहद घोल कर जरूर पिए। इसे आपके आँतों की सफाई होगी और शरीर से विषाक्त पदार्थों का उत्सर्जन आसानी से होगा, जिससे आपको वजन घटाने और नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

बादाम और अन्य ड्राई फ्रूट्स

दिन की शुरुआत में भीगे हुए बादाम खाना फायदेमंद रहता है। बादाम में मौजूद विटामिन ई, फाइबर, ओमेगा-3 और ओमेगा-6 फैटी एसिड आपको सर्दियों में अपने शरीर को गर्म रखने में मदद करेंगे। अतः सुबह खाली पेट 5-6 बादामों को नियमित रूप से खाएं। बादाम के साथ अन्य ड्राई फ्रूट्स जैसे किशमिश, पिस्ता और अखरोट भी आप अपनी सर्दियों की डाइट में शामिल कर सकते हैं। एक उचित मात्रा में खाए हुए सूखे मेवे पाचन में सुधार करने के साथ ऊर्जा भी प्रदान करते हैं।

तरबूज

नाश्ते में आप फलों को शामिल करना सही रहता है और इन फलों में बेहतर विकल्प है तरबूज क्योंकि सर्दियों में लोग अक्सर कम पानी पीते हैं। इसलिए तरबूज का सेवन आपको शरीर में पानी की कमी को पूरा करने में सहायता करेगा और यह शुगर क्रेविंग को भी रोकता है। इलेक्ट्रोलाइट्स से भरपूर तरबूज में लाइकोपीन का उच्च स्तर होता है, जो हृदय और आंखों को स्वस्थ बनाए रखता है।

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पपीता

खाली पेट पपीता खाना आपकी आंतों के लिए अच्छा माना रहता है। यह पेट से जुड़ीं कई समस्याओं को दूर करने में मदद करता है। वैसे पपीता हर मौसम में और हर जगह पर उपलब्ध रहता है। इसे अपनी सर्दियों की डाइट में शामिल किया जा सकता है। यह आपके कोलेस्ट्रॉल कम करता है, जिससे वजन कंट्रोल करने में मदद मिलती है।

ओटमील 

पोषक तत्वों से भरा ओटमील सिर्फ सर्दी नहीं हर मौसम की डाइट में फिट बैठता है। खाली पेट ओटमील शरीर में ताकत देता है और कम कैलोरी के साथ उच्च पोषक तत्व प्रदान करता है। इसके सेवन से आपकी आँतों की सफाई भी अच्छी होती है और उस पर अधिक जोर भी नहीं पड़ता।


हड्डियों की मजबूती के लिए कैल्शियम के साथ शामिल करें यह पोषक तत्व।

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मजबूत हड्डियाँ आपके शरीर को सही आकार के साथ ताकत प्रदान करती है। इसके अलावा यह शरीर के नाजुक हिस्सों को चोट से बचाती है। लेकिन सही तरह से हड्डियों पर ध्यान ना देने के कारण यह खुद आपके लिए दर्द की समस्या बन सकती है। आज के समय में हड्डी व जोड़ों का दर्द किसी भी आयु वर्ग के व्यक्ति में देखा जा सकता है।

हड्डियों को स्वस्थ और मजबूत बनाने में कैल्शियम का नाम सबसे पहले आता है और यह एक मायने में सही भी है लेकिन सिर्फ कैल्शियम अकेला हड्डियों को ताकत नहीं दे सकता। हालाँकि बचपन से अभी तक लोग हड्डियों को स्ट्रॉन्ग बनाने के लिए सिर्फ कैल्शियम पर ही जोर देते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कैल्शियम के अलावा अन्य कई पोषक तत्व है, जो हड्डियों को स्वस्थ बनाए रखने और सही आकार देने में मदद करते है।

इन पोषक तत्वों में कैल्शियम के साथ नाम आता है विटामिन डी का, यह ना सिर्फ आपकी हड्डियों को मजबूत करता है बल्कि आपके प्रतिरक्षा तंत्र को भी मजबूत बनाता है। Vitamin D की कमी से शरीर में सुस्ती और थकान की समस्या पैदा हो जाती है। यह आपके प्रतिरक्षा तंत्र के कार्यों को धीमा कर देता है। विटामिन D की कमी हड्डियों को कमजोर बना देती है, आइए आज के इस लेख से जानते है कि आपके शरीर को कैल्शियम और विटामिन डी की कितनी जरूरत है और इसके लिए किन खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए।

प्रतिदिन कैल्शियम लेने की मात्रा

1 से 3 साल के बच्चे: 700 मिलीग्राम

4 से 8 साल के बच्चे: 1,000 मिलीग्राम

9 से 18 साल के बच्चे: 1,300 मिलीग्राम

वयस्क (19 से 50 साल): 1,000 मिलीग्राम

महिलाएं (51 से 70 साल): 1,200 मिलीग्राम

पुरुष (51 से 70 साल): 1,000 मिलीग्राम

महिला और पुरुष 70 साल से अधिक: 1,200 मिलीग्राम

कैल्शियम प्राप्त करने का स्रोत

सामान्य तौर पर अपनी डाइट में कैल्शियम शामिल करने तरीका है डेयरी उत्पाद। आप दूध, पनीर और दही आदि के प्रतिदिन सेवन से उचित मात्रा में कैल्शियम प्राप्त कर सकते हैं। लेकिन इसके अलावा अन्य कई खाद्य पदार्थ है, जो हमें कैल्शियम के स्तर को बढ़ाने में मदद करते हैं:

  • पालक
  • गोभी
  • ओकरा
  • कोलार्ड्स
  • सोयाबीन
  • सफेद सेम
  • दलिया
  • संतरे का रस (कैल्शियम-फोर्टिफाइड)
  • अनाज का नाश्ता
  • मछलियाँ (सार्डिन, सामन, पर्च और रेनबो ट्राउट)

प्रतिदिन विटामिन डी लेने की मात्रा

1 से 70 साल: 600 IU

70 साल से अधिक: 800 IU

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विटामिन डी प्रदान करने वाले खाद्य पदार्थ और स्रोत

विटामिन डी प्राप्त करने का सबसे प्रमुख स्रोत है धूप। सूरज की रौशनी से विटामिन डी प्राप्त करना सबसे सरल तरीका माना जाता है और सर्दियों में यह तरीका पसंदीदा भी हो जाता है। धूप के अलावा कई खाद्य पदार्थों के सेवन से शरीर में विटामिन डी की कमी को पूरा किया जा सकता है।

  • वसायुक्त मछली (टूना, मैकेरल, और सैल्मन)
  • डेयरी उत्पाद
  • संतरे का रस
  • सोया दूध
  • अनाज
  • पनीर
  • अंडे


'ओमिक्रॉन' कर सकता है कोरोना वैक्सीन को भी बेअसर, लाइफ स्टाइल में शामिल करें जरूरी आदतें

 

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कोरोना वायरस के वैश्विक मामले वर्तमान समय तक 26.34 करोड़ हो गए हैं। इसमें मरने वालों की कुल संख्या 52.2 लाख हो गई है। इस महामारी से बचाव के लिए अभी तक 8.03 अरब लोगों को टीका लगाया जा चुका है लेकिन कोरोना वायरस के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन के सामने कोरोना वैक्सीन भी कम प्रभावी होती साबित हो रही है।

वैक्सीन लगवाने के बाद अधिकतर लोग थोड़े बेपरवाह हो गए हैं लेकिन Coronavirus का नया वैरिएंट ओमिक्रोन सभी को संक्रमित कर रहा है। एक्सपर्ट्स के अनुसार यह डेल्टा वैरिएंट से भी ज्यादा संक्रामक है और यह कमजोर इम्यूनिटी वालों के लिए बेहद घातक हो सकता है। साउथ अफ्रीका में सामने आए इस नए वैरिएंट के कई मामलों के बाद अन्य देशों के साथ भारत में भी इसके नए केस सामने आने लगे हैं। ऐसे समय में यह जरुरी है कि समय रहते आप अपनी जीवनशैली और डाइट में जरुरी बदलाव करके अपनी इम्यूनिटी को स्ट्रॉन्ग बना ले ताकि संक्रमण से अपना बचाव किया जा सकें। आइए इन जरुरी आदतों के बारे में जान लेते हैं -

कोविड-19 के नियमों का पालन करें और कराएं -

लॉकडाउन से मिली छूट और वैक्सीन लगने के बाद अधिकतर लोग अपनी पुराणी दिनचर्या पर आ गए हैं और जी भर कर लापरवाही कर रहे हैं। ऐसे में एक अच्छे नागरिक के तौर पर आप स्वयं कोविड-19 के नियमों का पालन करें और आस - पास के लोगों को भी इसमें शामिल करें। भारत के अलावा अधिकतर देशों में सिर्फ वयस्कों को ही वैक्सीन लगी है इसलिए अपने बच्चों का विशेष ध्यान रखें और उन्हें स्वयं कोविड-19 के नियमों का पालन जरूर कराएं।

खान-पान में रखें विशेष ध्यान -

सबसे पहले अपनी डाइट में एंटीऑक्सीडेंट्स फूड की श्रेणी में आने वाली सब्जियां, फल और नट्स आदि को शामिल करें। यह आपको इम्युनिटी सिस्टम को मजबूत बनाने में मदद करेंगे। इसके अलावा सर्दी के मौसम में प्यास भी कम लगती है इसलिए शरीर में पानी की कमी न होने दें। इसका असर आपके इम्यून सिस्टम पर पड़ सकता है। अतः प्रतिदिन जरुरी मात्रा में पानी पीएं।

हेल्थ चेकअप जरुरी है -

पिछले दो सालों में लोगों के स्वास्थ्य को काफी प्रभावित किया है इसलिए अपने हेल्थ का चेकअप जरूर कराएं ताकि आपको अपने शरीर के लिए आवश्यक विटामिन, मिनरल्स आदि पोषक तत्वों की जानकारी प्राप्त होगी। अच्छे स्वास्थ्य के लिए शरीर में विटामिन डी, कैल्शियम, आयरन आदि का स्तर कम नहीं होना चाहिए।

तनाव से बचें -

तनाव / चिंता का सीधा असर आपकी इम्युनिटी पर पड़ता है। कोरोना या अपने किसी भी निजी को कारण को चिंता का विषय न बनने दें यह आपको मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर करती है। ऐसी परिस्थिति में ज्यादा तनाव न ले और अपने आस-पास का माहौल भी खुशनुमा बनाए रखें।

भरपूर नींद स्वास्थ्य के लिए है जरुरी -

एक अच्छी नींद आपके अच्छे स्वास्थ्य में सहायक होती है। अपने कार्य और दिनचर्या के अनुसार अपने नींद का समय जरूर तय करें। इससे आपको दिन भर एक्टिव रहने में मदद मिलेगी।


लोग इस तरह हो जाते है मोटापे के शिकार!

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सार

मोटापा एक पुरानी व प्रगतिशील बीमारी है। यह पूरे शरीर को प्रभावित करती है। इससे जुड़ें मामले आपको सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में देखने को मिल जाएंगे। आप स्वयं भी कहीं ना कहीं इस बात से वाकिफ होंगे कि किस तरह बदलती दिनचर्या हमारे सामने मोटापे जैसी खतरनाक परिस्थिति पैदा कर सकती है।

विस्तार

मोटापा एक इस तरह का विकार है, जिसमें शरीर में चर्बी की मात्रा बढ़ जाती है। यह स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ा देता है। मोटापे के लिए कोई भी एक कारक जिम्मेदार नहीं है। जैविक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय कारक आसानी से उच्च कैलोरी वाले भोजन विकल्प युवाओं के खाने के व्यवहार को प्रभावित करते हैं। इनके अलावा मोबाइल, टेबलेट, कंप्यूटर जैसे मीडिया उपकरणों के कारण बच्चों और किशोरों में स्क्रीन समय बढ़ गया है, जिससे शारीरिक गतिविधियों में कमी आई है। यह बीमारी शरीर के प्रत्येक हिस्से को प्रभावित करती है, जिसमें जोड़ों की समस्या, फेफड़े पर प्रभाव, यकृत और प्रजनन स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है।

अधिक मात्रा में कैलोरी लेना, अधिक वसा का सेवन और आहार में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा ज्यादा होना मोटापे को बढ़ावा देते हैं। यह बीमारी विश्व स्तर की है। कोरोना काल के समय से लोगों में मोटापे की समस्याओं में वृद्धि हुई है क्योंकि लॉकडाउन के समय लोगों की दिनचर्या में काफी बदलाव आया था। शारीरिक गतिविधियों में कमी आई थी। घर से कार्य करने की आदत, चिंता और अव्यवस्थित खानपान ने मोटापे के मामलों को बढ़ा दिया।

एक स्वस्थ शरीर का मापन लंबाई और वजन के सही अनुपात से किया जाता है। बॉडी मास इंडेक्स मीटर में ऊंचाई के वर्ग से विभाजित किलोग्राम में एक व्यक्ति का वजन है। गणना का यह तरीका महिला और पुरुषों के लिए अलग-अलग है। बीएमआई की गणना आप स्वयं कर सकते हैं या इसे ऑनलाइन भी कर सकते हैं। सामान्य बीएमआई 18.5 किग्रा/मीटर वर्ग से शुरू होकर 25 किग्रा/मी2 तक होता है। अगर संख्या 15 से कम है तो इसका मतलब है कि आपका वजन कम है। 25 से 30 बीएमआई को अधिक वजन माना जाता है और 30 से अधिक का मतलब है कि आप मोटे हैं।

निष्कर्ष

विश्व व्यापक मोटापे की बीमारी भले ही चिंताजनक हो लेकिन इस पर नियंत्रण किया जा सकता है। कोई भी व्यक्ति एक सही दिनचर्या के पालन से इस समस्या से छुटकारा प्राप्त कर सकता है, इसलिए सबसे पहले बीएमआई की गणना से अपने मोटापे के स्तर का मूल्याङ्कन कीजिए। फिर उस हिसाब से अपनी डाइट और शारीरिक गतिविधियों में बदलाव करें।


ये 5 चीजें देगी ठंड में भी गर्मी का अहसास, आज ही शामिल करें अपनी डाइट में।

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ठंड का मौसम शुरू हो गया है। सभी लोग सर्दी व सामान्य ठंड से बचाव के लिए अपने स्तर पर अपनी आवश्यकता अनुसार प्रयासों में लग गए हैं। कई लोग ऐसे होते हैं जिन्हे ठंड बहुत ज्यादा लगती हैं। ऐसे लोग तो सर्दियां शुरू होने से पहले ही अपने बचाव के लिए बॉडी वॉर्मर, स्वेटर, जैकेट और कैप आदि का बंदोबस्त कर लेते हैं। 

अगर आपको भी अन्य लोगों की तुलना में ज्यादा ठंड लगती है तो अपनी डाइट में इन 5 चीजों को जरूर शामिल करें। इस पाँच चीजों में मौजूद न्यूट्रिएंट आपकी इम्युनिटी को स्ट्रॉन्ग करने के साथ-साथ आपके शरीर को भी गर्म रखेंगे।

मूंगफली: मूंगफली में प्रोटीन अच्छी मात्रा में पाया जाता है। यह आपके शरीर में प्रोटीन की कमी को पूरा करती है। सर्दियों में अक्सर स्नैक्स की तरह खाये जाने वाली मूंगफली शरीर गर्म रखने में मदद करती है। ध्यान रहे आप जरुरत से ज्यादा मूंगफली न खाएं अन्यथा आपको पाचन से संबंधित परेशानियां हो सकती हैं।

शकरकंद: आलू व अन्य जड़ वाली सब्जियों की तरह शकरकंद को पचाने में भी अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती हैं, जिससे आपके शरीर में गर्मी बढ़ती है। शकरकंद में विटामिन ए, विटामिन सी, पोटेशियम और फाइबर उच्च मात्रा में पाए जाते हैं, इसलिए यह सर्दियों में गर्म भोजन के तौर पर लिया जाता है।

हरी मिर्च: एंटीऑक्‍सीडेंट गुणों से भरपूर हरी मिर्च में विटामिन सी, ई और फाइबर अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं। इससे आपकी इम्यूनिटी भी बढ़ती है और यह आपके शरीर में गर्मी बनाए रखती है।

हल्दी: हल्दी की ताशीर गर्म होती है। भारत में तो शुरू से ही सर्दियों के दौरान हल्दी वाले दूध का प्रचलन रहा है। आयुर्वेद ने भी हल्दी को रोग नाशक गुणों में श्रेष्ठ बताया है। ठंड से बचाव के लिए आप एक गिलास गर्म दूध में दो चुटकी हल्दी डालकर इसमें थोड़ा पानी डालकर इसे दस मिनट तक उबाल कर पी सकते है। इसके अलावा आप इसे सब्जी के रूप में भी खा सकते है। जरुरत से ज्यादा मात्रा में हल्दी का सेवन ना करें।

अदरक: इम्यूनिटी बूस्टर अदरक का उपयोग डाइट में कई तरह से किया जा सकता है। ठंड में अदरक के सेवन का सबसे अधिक पसंदीदा तरीका है अदरक वाली चाय। इसके अलावा आप अदरक को सब्जी में डाल सकते हैं और अदरक वाला दूध भी पी सकते हैं।

उपरोक्त 5 चीजों का सेवन हर कोई कर सकता है। सही मात्रा में इन्हे अपने डाइट में शामिल करने पर इनके न्यूट्रिएंट्स का भरपूर फायदा मिलेगा, जो आपके शरीर को ठंड में गर्म रखने के साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बनाए रखेंगे।


सर्दियों में रखें अपने Vitamin D के स्तर का ध्यान।

 

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विटामिन डी की कमी आपको जरुरत से ज्यादा थका देती है। सर्दियां आते ही आपको थकान और सुस्ती महसूस होने लगती है, इससे आप विंटर ब्लूज के शिकार भी हो सकते हैं।

Vitamin D का प्राकृतिक स्रोत सूरज की रोशनी है। यह विटामिन हमारे समस्त स्वास्थ्य के लिए बहुत जरुरी है लेकिन इसे लेकर लोगों में जागरूकता बेहद कम है। विटामिन डी की पूर्ति के लिए सूरज की रौशनी आवश्यक है और यह आवश्यकता सर्दियों के समय में और भी ज्यादा बढ़ जाती है। इसलिए सर्दियों में धूप का सेवन अधिक करना चाहिए। पिछले 2 साल के दौरान लोग वैसे भी कोरोना के कारण आम दिनों की तुलना में कम निकले हैं और अब सर्दी की वजह से लोग बाहर निकलने से कतराते हैं। Work From Home की स्थिति ने तो घर से बाहर निकलना ना के बराबर कर दिया है।

ऐसी स्थितियों के कारण लोगों में विटामिन डी की कमी शुरू हो जाती है, जिससे अधिकतर लोग बे-खबर रहते हैं। कईं लोगों के मन में ऐसे प्रश्न जरूर आते हैं कि Vitamin D की कमी सिर्फ धूप से पूरी की जा सकती है? विटामिन डी के लिए सप्लीमेंट और दवाई लेने की आवश्यकता है? Vitamin D की कमी के क्या लक्षण है? विटामिन डी की कमी से क्या समस्याएँ उत्पन्न होती है? आइए आज के इस लेख से जानते हैं ऐसे सभी सवालों के उत्तर के बारे में -

हमारे शरीर के लिए विटामिन डी क्यों ज़रूरी है?

हमारी दिनचर्या को बेहतर बनाए रखने के लिए यह विटामिन बहुत आवश्यक है। यह हमारी हड्डियों व दांतों को स्वस्थ बनाए रखता है और इनके सामान्य विकास को आसान बनता है। इसके साथ यह चिंता को कम करने और समग्र प्रतिरक्षा को बढ़ाने में सहायक होता है। यह शरीर में कैल्शियम और फास्फोरस के अवशोषण को नियंत्रित करने में मदद करता है। प्रतिरक्षा तंत्र और उनके कार्यों को बढ़ावा देता है।

Vitamin D की कमी के लक्षण और समस्याएँ

अगर आपको अपने शरीर में पिछले कुछ दिनों से निम्नलिखित लक्षण दिखाई दें तो यह Vitamin D की कमी के संकेत हो सकते हैं -

  • अधिक थकान महसूस होना
  • दैनिक कार्यों को करने में परेशानी होना और कमजोरी आना।
  • मांसपेशियों में कमजोरी आना और आम चाल-चलन में कठिनाई आना।
  • डिप्रेशन की समस्या भी विटामिन डी की कमी का संकेत है।
  • इसके अलावा चोट ठीक होने में वक्त लगना और बालों का झड़ना भी इस विटामिन की कमी के लक्षण है।

विटामिन डी का पता कैसे लगाए?

इसका पता लगाने के लिए रक्त परीक्षण की मदद ली जाती है। इसमें भी 2 तरह के परीक्षण होते हैं, जिसमें 25-हाइड्रोक्सीविटामिन डी आम है। इसे संक्षेप में (25 OH) डी कहा जाता है।

Vitamin D से भरपूर स्रोत

  • वैसे तो सूरज की रोशनी, विटामिन डी के स्तर को बढ़ाने का सबसे अच्छा और सबसे प्राकृतिक स्रोत है। लेकिन इसके अलावा कईं ऐसे खाद्य पदार्थ है, जो विटामिन डी की कमी को पूरा करने में मदद करते हैं –
  • अंडे की जर्दी से हमें अच्छी मात्रा में विटामिन डी प्राप्त होता है। इसमें चिकन के अंडे अधिक फायदेमंद साबित होते हैं।
  • सारे डेयरी प्रोडक्ट (टोफू, दही, गाय का दूध) VITAMIN D के स्रोत माने जाते हैं। चीज़ विटामिन डी का बेहतरीन स्रोत है।
  • मशरूम (Mushroom) में विटामिन डी अच्छी मात्रा में पाया जाता है और सप्लीमेंट के रूप में विटामिन डी के स्तर को बढ़ाने में प्रभावी प्रतीत होते हैं।
  • रागी के आटे में भी विटामिन D पाया जाता है।

विटामिन डी प्राप्त करने के लिए नियमित धूप का सेवन और उपरोक्त स्रोत कारगर साबित होते हैं लेकिन आपके शरीर में VITAMIN D का स्तर अधिक नीचे चला गया है तो आपको चिकित्सक की परामर्श के अनुसार अन्य सप्लीमेंट्स और दवाओं का सहारा लेना पड़ सकता है। इसलिए हमें ऐसी परिस्थिति आने से पहले सजग हो जाना चाहिए।